बलूचिस्तान में बड़ा हमला, 13 अलग-अलग ऑपरेशन में 43 पाकिस्तानी सैनिकों के मारे जाने का दावा

Aanya18 September 20263 min read25 viewsWorld
बलूचिस्तान में बड़ा हमला, 13 अलग-अलग ऑपरेशन में 43 पाकिस्तानी सैनिकों के मारे जाने का दावा

पाकिस्तान के अशांत प्रांत बलूचिस्तान में हिंसा की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। हाल ही में आई एक बड़ी रिपोर्ट के अनुसार, बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) ने यह दावा किया है कि उन्होंने पिछले कुछ दिनों में कुल 13 बड़े ऑपरेशन अंजाम दिए हैं। इस दौरान सुरक्षा बलों और कथित डेथ स्क्वाड के सदस्यों को निशाना बनाया गया, जिसमें 43 पाकिस्तानी सैन्य कर्मियों के मारे जाने की बात कही गई है। इस पूरी घटना से पूरे इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है और स्थानीय लोग डरे हुए हैं।

विभिन्न जिलों में चलाए गए हमले

द बलूचिस्तान पोस्ट (TBP) की रिपोर्ट के मुताबिक, बीएलए के प्रवक्ता जीयंद बलूच ने एक साप्ताहिक बयान जारी कर इन सभी हमलों की जानकारी साझा की है। यह सभी ऑपरेशन 7 सितंबर से 13 सितंबर के बीच अलग-अलग इलाकों में किए गए। जिन प्रमुख जगहों पर यह कार्रवाई हुई, उनमें बासिमा, खरान, पंजगुर, चागाई, तुंप, सुराब, किला अब्दुल्ला, लस्बेला, जितानी और माशकेल शामिल हैं। इन इलाकों में लगातार हो रही हिंसक झड़पों से आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है और लोगों को आने-जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

GulfHindi की हर खबर सबसे पहलेJoin

आर्थिक गलियारे और सैन्य काफिले बने निशाना

संगठन के लड़ाकों ने मुख्य मार्गों और राजमार्गों को जाम करने के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाया। 7 सितंबर को बासिमा इलाके में चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के रूट पर पांच घंटे तक नाकाबंदी की गई और गाड़ियों की सघन जांच की गई। इस दौरान हुई गोलीबारी में पांच पाकिस्तानी सैनिक मारे गए। इसके अलावा, 8 सितंबर को खरान के नौरोज कलात में सेना के एक काफिले पर घात लगाकर हमला किया गया। पंजगुर और माशकेल क्षेत्रों में भी सैन्य उपकरणों और कैमरों को नष्ट करने की खबरें सामने आई हैं।

परिवहन और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान

हिंसा का यह दौर यहीं नहीं रुका, बल्कि 10 सितंबर को चागाई के चेहातर में क्वेटा-तफ्तान व्यापारिक मार्ग को रोक दिया गया। इस दौरान कमर्शियल गाड़ियों को कब्जे में लिया गया और विस्फोटकों की मदद से एक पुराने पुल को भी उड़ा दिया गया। जब पाकिस्तानी सेना के जवान वहां पहुंचे, तो उन पर भी ताबड़तोड़ हमला कर दिया गया। इतना ही नहीं, तुंप इलाके में सुरक्षा बलों के एक सर्विलांस क्वाडकोप्टर यानी ड्रोन को भी मार गिराने का दावा किया गया है। इन लगातार हमलों से इलाके का इंफ्रास्ट्रक्चर तहस-नहस हो गया है।

लस्बेला और सुरब में भीषण झड़पें

11 और 12 सितंबर को सुरब और लस्बेला में भी भयंकर संघर्ष देखने को मिला। सुरब के गिदार इलाके में सेना के दो वाहनों पर सीधे हमले किए गए, जिसमें छह जवानों की मौत हो गई। वहीं, लस्बेला के किशारी क्षेत्र में सेना की बम निरोधक पार्टी के काफिले पर घातक हमला किया गया, जिसमें दो गाड़ियां पूरी तरह तबाह हो गईं। इस हमले में 9 सैनिकों के मारे जाने और 11 से अधिक के घायल होने की बात कही गई है। संगठन ने साफ किया है कि जब तक विदेशी और सरकारी सेना इस क्षेत्र से पूरी तरह पीछे नहीं हटती और एक स्वतंत्र बलूचिस्तान का गठन नहीं होता, तब तक उनका यह संघर्ष विभिन्न मोर्चों पर लगातार जारी रहेगा।

Share:

Comments

Leave a comment