बलोचिस्तान में बड़ा हमला, बीएलए की महिला शाखा ने उड़ाई पाकिस्तानी सेना की गाड़ियां

बलोचिस्तान में सुरक्षा हालात एक बार फिर से तनावपूर्ण हो गए हैं जहां अलगाववादी ताकतों ने पाकिस्तानी सेना के खिलाफ अपने हमलों को और तेज कर दिया है। ताजा घटनाक्रम में बलोचिस्तान लिबरेशन फ्रंट की नई गठित महिला सशस्त्र शाखा ने सुरक्षा बलों को निशाना बनाते हुए बड़ा हमला किया है। इस हमले में पाकिस्तानी सेना के कई अधिकारियों के मारे जाने की आधिकारिक और शुरुआती रिपोर्ट्स सामने आ रही हैं जिससे इलाके में सनसनी फैल गई है। आम जनता और स्थानीय लोगों के बीच इस बात की चर्चा है कि बलोच संघर्ष में अब महिलाओं ने भी सक्रिय रूप से हथियार उठा लिए हैं जो कि एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
दो अलग-अलग स्थानों पर किए गए सटीक हमले
क्वेता से मिली जानकारी के मुताबिक 22 सितंबर और 25 सितंबर को बलोचिस्तान लिबरेशन फ्रंट की महिला शाखा जिसे 'करीमा आर्म्ड असॉल्ट डिवीजन' यानी कैड नाम दिया गया है ने सुनियोजित तरीके से दो बड़े ऑपरेशन को अंजाम दिया। यह हमले तुर्बत के जोस्क इलाके में चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा यानी CPEC हाईवे और कलात के मंगचर शहर में क्वेटा-कराची हाईवे पर किए गए। इन अभियानों के दौरान कैड की महिला लड़ाकों ने पाकिस्तानी सेना की क्विक रिस्पॉन्स फोर्स की तीन गाड़ियों को बम से उड़ा दिया। इस भीषण मुकाबले में सेना के कम से कम 9 अधिकारी मारे गए हैं।
कुर्बान यूनिट का मिला पूरा समर्थन
इस पूरे सैन्य ऑपरेशन को सफल बनाने के लिए कैड को बलोचिस्तान लिबरेशन फ्रंट की जानी-मानी कुर्बान यूनिट का पूरा समर्थन और सहयोग मिला। संगठन के प्रवक्ता बलोच की तरफ से मीडिया को जारी किए गए बयान में बताया गया कि इस संघर्ष के दौरान कुर्बान यूनिट के कमांडर कैप्टन चकर मुराद उर्फ दिलीप जान शहीद हो गए। कैप्टन चकर मुराद फरवरी 2021 में औपचारिक रूप से बलोचिस्तान लिबरेशन फ्रंट के मंच से आजादी की इस लड़ाई में शामिल हुए थे। अपने जीवन का एक लंबा वक्त उन्होंने जेल में बिताया था और जेल से रिहाई मिलने के बाद वह पूरी तरह से बीएलए के साथ जुड़कर काम कर रहे थे।
क्षेत्र में बढ़ता तनाव और सुरक्षा के कड़े इंतजाम
तुर्बत और मंगचर में हुए इन दोनों खतरनाक हमलों के बाद पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा एजेंसियों के होश उड़ गए हैं। हाईवे पर हुए इन धमाकों के बाद से पूरे इलाके में भारी संख्या में सेना के जवानों को तैनात किया गया है और आने-जाने वाले वाहनों की कड़ी चेकिंग की जा रही है। बलोच लड़ाकों की तरफ से लगातार मिल रही इस तरह की कड़ी चुनौतियों से पाकिस्तान की सरकार और सेना की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस तरह से बलोच महिलाएं अब खुलकर मैदान में उतर रही हैं उससे आने वाले दिनों में संघर्ष और ज्यादा तीव्र हो सकता है। इस पूरी घटना के सामने आने के बाद से सीमावर्ती और संवेदनशील इलाकों में डर का माहौल बना हुआ है जबकि प्रशासन स्थिति को नियंत्रित करने के दावे कर रहा है।