Balochistan News: बलूचिस्तान के शादि कोर इलाके में जबरन गायब करने और बेघर करने का मामला आया सामने

पाकिस्तान के अशांत प्रांत Balochistan में मानवाधिकारों की स्थिति को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बलूच लोगों के अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाले प्रमुख संगठन Baloch Yakjehti Committee (BYC) ने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। संगठन का कहना है कि सुरक्षा बलों ने शादि कोर क्षेत्र में लोगों को जबरन गायब करने, बिना किसी ठोस कारण के हिरासत में लेने और लोगों को उनके घरों से बेदखल करने का एक बड़ा अभियान चलाया है। इस कार्रवाई की वजह से वहां रहने वाले हजारों आम नागरिकों पर सीधा असर पड़ा है और पूरे प्रांत में डर का माहौल बना हुआ है।
क्वेत्ता और अवारन में बढ़ रही हैं घटनाएं
यह ताजा मामला बलूचिस्तान में लंबे समय से चली आ रही मानवाधिकारों के उल्लंघन की घटनाओं की एक कड़ी है। इस क्षेत्र में हालात इतने खराब हैं कि पीड़ित परिवार और विभिन्न न्याय संगठन पिछले 6,300 दिनों से ज्यादा समय से क्वेटा प्रेस क्लब के बाहर लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। हाल ही के दिनों में सामने आई घटनाओं में 16 साल के Agha Gul और 27 साल के Hafeezullah Baloch को क्वेटा से अगवा किए जाने की बात सामने आई है। इसके अलावा, अवारन जिले से एक किसान Rafiq Baloch के भी लापता होने की खबर है, जिससे आम लोगों में रोष और चिंता दोनों बढ़ रही हैं.
मानवाधिकार संगठनों के चौंकाने वाले आंकड़े
बलूच नेशनल मूवमेंट के मानवाधिकार विभाग Paank की एक रिपोर्ट के अनुसार, अकेले 24 अगस्त 2026 को पाकिस्तानी बलों द्वारा चार और आम नागरिकों को जबरदस्ती गायब कर दिया गया था। वहीं दूसरी तरफ, Human Rights Council of Balochistan (HRCB) के आंकड़ों के मुताबिक, केवल साल 2025 के दौरान राज्य की सुरक्षा एजेंसियों और उनसे जुड़े मिलिशिया द्वारा जबरन गायब किए जाने के 1,482 मामले दर्ज किए गए थे। इन तमाम संगीन मामलों के बारे में अधिक जानकारी ANI News की रिपोर्ट में विस्तार से दी गई है.
सरकारी दावों पर उठ रहे हैं गंभीर सवाल
एक तरफ जहां आम लोग और मानवाधिकार संगठन लगातार न्याय की गुहार लगा रहे हैं, वहीं पाकिस्तानी सरकार का Commission of Inquiry on Enforced Disappearances (COIED) यह दावा करता रहा है कि उसने साल 2011 से अब तक दर्ज करीब 7,000 मामलों में से लगभग 5,000 मामलों को सुलझा लिया है। हालांकि, मानवाधिकार संगठनों ने इन सरकारी आंकड़ों को सिरे से खारिज किया है और कहा है कि यह आयोग पूरी तरह से नाकाम साबित हुआ है और मामलों को दबाने का काम कर रहा है। दूसरी ओर, पाकिस्तानी अधिकारियों ने हमेशा की तरह इन सभी आरोपों को झूठा बताते हुए इन्हें अलगाववादियों का प्रचार करार दिया है, जबकि स्थानीय लोग आज भी अपने अपनों की सुरक्षित वापसी का इंतजार कर रहे हैं। इस पूरी घटना के बारे में मूल जानकारी ANI News के माध्यम से सामने आई है।