बलूचिस्तान में जबरन गायब लोगों के बढ़ते मामले, परिवारों में दहशत

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत से जबरन गायब किए गए लोगों की खबरें एक बार फिर सामने आ रही हैं, जिसने मानवाधिकार समूहों और स्थानीय परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, एक व्यक्ति के रहस्यमयी तरीके से गायब होने और एक अन्य के लंबे समय बाद वापस लौटने की घटनाएं सामने आई हैं, जो इस क्षेत्र में जारी अस्थिरता और डर की कहानी बयां करती हैं।
ताजा मामले में, मस्तुंग जिले के इसपलिंजी निवासी शेर बाज बंगुलज़ई के गायब होने की खबर है। बताया जा रहा है कि शेर बाज, जो पेशे से बस कंडक्टर थे, उन्हें 18 जुलाई को मस्तुंग के दश्त इलाके से कथित तौर पर उठा लिया गया। उनके परिवार ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि इस घटना के पीछे फ्रंटियर कॉर्प्स और काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट के कर्मियों का हाथ है। हालांकि, अब तक इस मामले में किसी भी आधिकारिक विभाग ने कोई पुष्टि नहीं की है और शेर बाज का कोई सुराग नहीं मिल पाया है।
एक की वापसी, लेकिन डर बरकरार
दूसरी ओर, क्वेटा के किल्ली अल्मास निवासी शोएब बलोच के वापस लौटने से उनके परिवार में खुशी तो है, लेकिन यह घटना उस दर्द को भी याद दिलाती है जिससे वे गुजरे। शोएब 4 अगस्त को लापता हो गए थे और करीब एक साल बाद 25 सितंबर को उन्हें क्वेटा के जबल-ए-नूर इलाके से बरामद किया गया।
इन घटनाओं ने बलूचिस्तान में 'जबरन गायब' किए जाने के मुद्दे को फिर से गरमा दिया है। मानवाधिकार संगठनों और बलोच राजनीतिक दलों का आरोप है कि राज्य की संस्थाएं बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के लोगों को हिरासत में ले लेती हैं और उन्हें दुनिया से पूरी तरह काट दिया जाता है। हालांकि, पाकिस्तानी अधिकारियों ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका दावा है कि बलूचिस्तान में सभी सुरक्षा अभियान कानून के दायरे में रहकर ही चलाए जा रहे हैं।
कार्यकर्ताओं का यह भी कहना है कि असल आंकड़े इससे कहीं ज्यादा हो सकते हैं, क्योंकि डर और सामाजिक दबाव के कारण कई परिवार अपने परिजनों के गायब होने की खबर सार्वजनिक नहीं कर पाते। इससे इस गंभीर समस्या का वास्तविक पैमाना दुनिया के सामने नहीं आ पाता है।