बलूचिस्तान में खौफ: पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर जबरन गायब करने के गंभीर आरोप

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में लोगों के जबरन गायब होने की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। ताजा मामला खुजदार जिले के नाल इलाके का है, जहां 32 वर्षीय ड्राइवर मुनीर अहमद को उनके घर से कथित तौर पर जबरन उठा लिया गया। परिजनों का आरोप है कि 2 अक्टूबर की रात करीब 9 बजे एक सशस्त्र समूह, जिसे उन्होंने राज्य समर्थित 'डेथ स्क्वाड' बताया, उन्हें उनके निवास से ले गया। तब से मुनीर का कोई पता नहीं चला है, जिससे उनके परिवार में डर और चिंता का माहौल है।
बलूचिस्तान में यह कोई पहली घटना नहीं है। यहाँ के परिवार अक्सर इस दर्द से गुजरते हैं कि उनके अपनों को बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के अज्ञात स्थानों पर ले जाया जाता है। हालांकि, कुछ मामलों में राहत भी दिखी है। गदादर जिले के पसनी निवासी रशीद बलोच, जो 30 अगस्त से लापता थे, करीब एक महीने बाद 27 सितंबर को वापस घर लौटे। हालांकि, उनकी वापसी की परिस्थितियों के बारे में अभी तक कोई विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।
मानवाधिकार संगठनों ने जताई गहरी चिंता
बलूचिस्तान में जबरन गायब किए जाने का मुद्दा अब एक गंभीर मानवाधिकार संकट बन चुका है। ह्यूमन राइट्स काउंसिल ऑफ बलूचिस्तान (HRCB) के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2026 के दौरान पूरे प्रांत में जबरन गायब होने के 87 मामले दर्ज किए गए। चौंकाने वाली बात यह है कि इन लापता लोगों में आठ महिलाएं और 17 किशोर भी शामिल थे, जो यह दर्शाता है कि सुरक्षा एजेंसियों की यह कार्रवाई किसी खास उम्र या लिंग तक सीमित नहीं है।
वहीं, बलोच यकजेहती कमेटी (BYC) के मानवाधिकार विभाग ने एक और गंभीर पहलू की ओर इशारा किया है। उनकी छमाही रिपोर्ट के मुताबिक, गायब होने की घटनाओं की रिपोर्ट दर्ज कराने में काफी देरी हो रही है। इसका मुख्य कारण यह बताया गया है कि परिवारों को डराया-धमकाया जाता है ताकि वे पत्रकारों या मानवाधिकार संगठनों के पास न जाएं।
एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने भी पाकिस्तान सरकार और उसकी सुरक्षा एजेंसियों पर कार्यकर्ताओं, छात्रों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं को अवैध रूप से हिरासत में लेने और उन्हें गायब करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा जैसे क्षेत्रों में एक्स्ट्रा ज्यूडिशियल किलिंग और जबरन गायब करने की ये घटनाएं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा और चिंता का विषय बनी हुई हैं।