जिनेवा में बलूचिस्तान पर बड़ा सम्मेलन, मानवाधिकार उल्लंघन और ज़ुबैर बलूच को दी गई श्रद्धांजलि

स्विट्जरलैंड के जिनेवा शहर में बलूचिस्तान के हालात को लेकर एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया। जिनेवा प्रेस क्लब में हुए इस आयोजन में दुनिया भर के मानवाधिकार रक्षक, राजनीतिक वैज्ञानिक, पत्रकार और सांसद शामिल हुए। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य बलूचिस्तान में मानवाधिकारों की स्थिति पर चर्चा करना और अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान इस तरफ आकर्षित करना था।
सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य और श्रद्धांजलि
इस सम्मेलन का शीर्षक “Occupied Balochistan at the Crossroads: Human Rights, Justice and the Struggle for Freedom” रखा गया था। कार्यक्रम के दौरान बलूच मानवाधिकार रक्षक, वकील और बलूच स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन के पूर्व अध्यक्ष एडवोकेट ज़ुबैर बलूच को श्रद्धांजलि भी अर्पित की गई। बलूच नेशनल मूवमेंट के सदस्य फहीम बलूच ने बताया कि इस आयोजन का मक़सद शहीद ज़ुबैर को सम्मान देना और बलूच लोगों की समस्याओं को वैश्विक मंच पर उठाना था।
अंतरराष्ट्रीय जांच और संयुक्त राष्ट्र से अपील
सम्मेलन में शामिल हुए वक्ताओं ने बलूचिस्तान में हो रहे कथित मानवाधिकार उल्लंघनों पर गहरी चिंता व्यक्त की। फहीम बलूच ने जानकारी दी कि बैठक में संयुक्त राष्ट्र से यह विशेष मांग की गई है कि वह बलूचिस्तान के लिए विशेष तथ्य-खोजी मिशन स्थापित करे। इन मिशनों को क्षेत्र का दौरा करने और वहां जमीनी हकीकत का आकलन करने की अनुमति दी जानी चाहिए ताकि मानवाधिकारों के हनन के मामलों की निष्पक्ष जांच हो सके।
बलूचिस्तान में लंबे समय से चल रहा है तनाव
बलूचिस्तान का क्षेत्र पिछले कई वर्षों से राजनीतिक अशांति, सशस्त्र विद्रोह और जबरन लोगों के गायब होने की घटनाओं से जूझ रहा है। इसके अलावा, यहां मनमाने ढंग से लोगों को हिरासत में लेने और राजनीतिक गतिविधियों पर पाबंदी लगाने के आरोप भी लगते रहे हैं। दूसरी ओर, बलूच अलगाववादी समूहों द्वारा सुरक्षा बलों पर हमले की घटनाएं भी सामने आती रही हैं, जिसके बाद पाकिस्तानी अधिकारी सुरक्षा अभियान चलाते हैं। जिनेवा में हुए इस सम्मेलन ने बलूच मुद्दों और वहां के राजनीतिक अधिकारों की बहस को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ला दिया है।