बलूचिस्तान के खुजदार में दो दोस्तों पर खूनी हमला, इलाज के दौरान दूसरे की भी मौत

पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। बलूचिस्तान के खुजदार जिले में अज्ञात बंदूकधारियों ने दो दोस्तों को निशाना बनाकर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाईं। इस क्रूर हमले में एक दोस्त की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि गंभीर रूप से घायल दूसरे दोस्त ने भी अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच 12 दिनों तक संघर्ष करने के बाद दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद से इलाके में दहशत और शोक का माहौल है।
शादी समारोह में जा रहे थे दोनों दोस्त
मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरी घटना 17 सितंबर की है। खुजदार के गेशा क्षेत्र के सोहरदाप इलाके के रहने वाले 25 वर्षीय किसान बरकत बलूच और उनके दोस्त आलम खान एक शादी समारोह में शामिल होने के लिए यात्रा कर रहे थे। रास्ते में अज्ञात सशस्त्र हमलावरों ने उनकी गाड़ी को रोककर उन पर अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। इस अचानक हुए हमले में आलम खान की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि बरकत बलूच बुरी तरह घायल हो गए।
अस्पताल में 12 दिन तक चला संघर्ष
हमले के बाद गंभीर रूप से घायल बरकत बलूच को तुरंत अस्पताल ले जाया गया। बेहतर इलाज के लिए उन्हें कराची के सिविल ट्रॉमा अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वहां डॉक्टरों ने उनकी जान बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन 12 दिनों तक चले कड़े संघर्ष के बाद 28 सितंबर को उन्होंने भी दम तोड़ दिया। एक ही हमले में दो दोस्तों की जान चले जाने से उनके परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
बलूच यकजेहती कमेटी ने उठाए गंभीर सवाल
इस घटना के बाद बलूच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। संगठन का आरोप है कि यह हमला बलूचिस्तान में बलूच नागरिकों के खिलाफ चल रही लक्षित हिंसा (टारगेटेड किलिंग) की एक बड़ी श्रृंखला का हिस्सा है। बीवाईसी ने क्षेत्र में हो रहे मानवाधिकारों के हनन और जबरन गायब किए जाने की घटनाओं पर भी गहरी चिंता जताई है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय से न्याय की गुहार
संगठन ने संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से इस बढ़ते संकट पर तुरंत संज्ञान लेने की अपील की है। बीवाईसी ने आलम खान और बरकत बलूच की मौत की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराने तथा दोषियों को कड़ी सजा दिलाने की मांग की है। इसके साथ ही, स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग भी जोर पकड़ रही है।