बलूचिस्तान में बीएलए का तांडव: एक हफ्ते में 21 ऑपरेशन और 16 पाकिस्तानी जवान ढेर

पाकिस्तान के अशांत प्रांत बलूचिस्तान में हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। हाल ही में बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने एक बड़ा दावा करते हुए सनसनी फैला दी है। संगठन के मुताबिक, उसके लड़ाकों ने महज एक हफ्ते के भीतर ताबड़तोड़ हमलों को अंजाम दिया है। इस दौरान पाकिस्तानी सेना को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। क्षेत्र में लगातार बढ़ रही इन वारदतों ने सुरक्षा तंत्र की नींद उड़ा दी है।
एक हफ्ते में 21 सशस्त्र अभियान चलाने का दावा
बीएलए के प्रवक्ता जीयांद बलूच ने मीडिया को जानकारी दी कि उनके संगठन ने 23 से 29 सितंबर के बीच पूरे प्रांत में कुल 21 सशस्त्र अभियान चलाए। इन हमलों में पाकिस्तानी सेना के 16 जवानों के मारे जाने की बात कही गई है। संगठन ने पाकिस्तानी सेना के उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें सेना ने हालिया कार्रवाई के दौरान 71 से अधिक बलूच लड़ाकों को मारने का दावा किया था। बीएलए ने इन सरकारी आंकड़ों को पूरी तरह मनगढ़ंत और जमीनी सच्चाई से कोसों दूर बताया है।
शिविरों और सैन्य काफिलों पर हमले
संगठन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इन ऑपरेशनों में कई सैन्य शिविरों और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया। क्वेटा के डघारी इलाके में स्थित एक सैन्य शिविर पर हुए भीषण हमले में नौ सैनिकों के मारे जाने और सात से अधिक के घायल होने का दावा किया गया है। इसके अलावा, मस्तुंग, वाध, सुराब और मंगुचार जैसे इलाकों में भी सैन्य शिविरों, गश्त दलों और बम निरोधक दस्तों पर हमले किए गए। इन कार्रवाइयों में राजमार्गों पर बने पुलों को भी बम से उड़ाए जाने और रास्तों को अवरुद्ध करने की बात सामने आई है ताकि सैन्य मूवमेंट को रोका जा सके।
खुफिया ऑपरेटिव्स को बनाया निशाना
सैन्य ठिकानों के अलावा, बीएलए ने पाकिस्तानी सेना के लिए कथित तौर पर जासूसी करने वाले स्थानीय लोगों को भी नहीं बख्शा। संगठन ने पास्नी, तर्बत और खारन जैसे क्षेत्रों में चार ऐसे लोगों की हत्या की जिम्मेदारी ली है, जिनपर पाकिस्तानी सैन्य खुफिया एजेंसी (एमआई) के लिए काम करने का आरोप था। संगठन का कहना है कि ये लोग बलूच लड़ाकों के खिलाफ खुफिया नेटवर्क चलाने में शामिल थे।
विशेषज्ञों का मानना है कि बलूचिस्तान में बढ़ते इन हमलों और दावों से क्षेत्र का सुरक्षा समीकरण और अधिक जटिल हो गया है। हालांकि, इन सभी दावों और प्रतिदावों की किसी स्वतंत्र स्रोत से पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन जमीनी हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं।