Pakistan News: बलोचिस्तान में सेना के काफिले पर बड़ा हमला, 13 जवान ढेर और कई गाड़ियां तबाह.

पाकिस्तान के अशांत इलाके बलोचिस्तान से एक बड़ी खबर सामने आ रही है जहाँ सेना के बख्तरबंद वाहनों पर जोरदार हमला हुआ है। इस हमले में सेना के 13 जवान मारे गए हैं और 10 से ज्यादा घायल हो गए हैं। इस पूरी घटना की जिम्मेदारी बलोचिस्तान लिबरेशन आर्मी यानी बीएलए ने ली है। संगठन के आधिकारिक चैनल हुकल पर एक वीडियो भी जारी किया गया है जिसमें इस पूरे हमले की पूरी झलक दिखाई दे रही है।
मस्तुंग इलाके में आईईडी विस्फोट से हुआ हमला
द बलोचिस्तान पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, बलोचिस्तान लिबरेशन आर्मी के कमांडरों ने मस्तुंग के खड़कोचा इलाके में पाकिस्तानी सेना के काफिले को निशाना बनाया था। आतंकवादियों ने एक शक्तिशाली आईईडी विस्फोट करके सेना की एक बख्तरबंद गाड़ी को पूरी तरह से तबाह कर दिया। इसके बाद दूसरी बख्तरबंद गाड़ी और उसके साथ चल रहे अन्य वाहनों पर भी चारों तरफ से घात लगाकर हमला किया गया। हमले के बाद ड्रोन से ली गई फुटेज भी सामने आई है जिसमें तबाही का मंजर साफ देखा जा सकता है। बीएलए के प्रवक्ता ने बताया कि इस ऑपरेशन में उनके विशेष सामरिक ऑपरेशन स्क्वॉड यानी एसटीओएस ने भी हिस्सा लिया था जिसे फतेह स्क्वायड भी कहा जाता है।
पहले भी हो चुके हैं बड़े हमले
आपको बता दें कि बलोचिस्तान लिबरेशन आर्मी पाकिस्तान का एक सशस्त्र संगठन है जो लगातार सुरक्षा बलों को निशाना बनाता रहा है। इसी साल 11 मार्च को बोलान जिले में जाफर एक्सप्रेस ट्रेन को हाईजैक कर लिया गया था और 180 से ज्यादा लोगों को बंधक बनाया गया था। इस घटना को भी बीएलए की फिदायीन यूनिट मजीद ब्रिगेड ने अंजाम दिया था। इस संगठन की स्थापना साल 2000 में बलोचिस्तान को पाकिस्तान से स्वतंत्र कराने के उद्देश्य से की गई थी। यह संगठन मुख्य रूप से पाकिस्तानी सुरक्षा अधिकारियों, सरकारी प्रतिष्ठानों और चीन समर्थित परियोजनाओं पर हमले करता रहा है।
इतिहास और पुराने विवाद
बलोचिस्तान और पाकिस्तान सरकार के बीच विवाद बहुत पुराना है। साल 1947 में जब ब्रिटेन ने भारत से जाने की घोषणा की थी, तब कलात रियासत ने अपनी स्वतंत्रता का ऐलान कर दिया था। बलोचिस्तान का ज्यादातर हिस्सा कलात रियासत के अंदर आता था। लेकिन मार्च 1948 में पाकिस्तान ने सेना भेजकर बलोचिस्तान पर जबरन कब्जा कर लिया था। इस कब्जे के बाद से ही वहां के लोगों में भारी असंतोष फैल गया और कई सशस्त्र विद्रोह शुरू हो गए। साल 1948 के अलावा 1958-59, 1973-77 और 2004 के बाद भी समय-समय पर बलोचिस्तान में बड़े विद्रोह होते रहे हैं। बलोच राष्ट्रवादी हमेशा से पाकिस्तान की संघीय सरकार पर उनके प्राकृतिक संसाधनों की लूट का आरोप लगाते आए हैं और अपनी जमीन के संसाधनों में पूरा हक और स्वायत्तता मांगते हैं। वहीं दूसरी तरफ, पाकिस्तान की सेना इन सभी विद्रोहों को दबाने के लिए सैन्य ताकत का इस्तेमाल करती रही है जिस पर अक्सर मानवाधिकार उल्लंघन के गंभीर आरोप भी लगते रहते हैं।