बलूचिस्तान में दो लोगों की हत्या पर मचा बवाल, मानवाधिकार संगठन ने लगाया फर्जी एनकाउंटर का आरोप.

बलोच मानवाधिकार संगठन Paank ने पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में दो बलूच नागरिकों की कथित तौर पर बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के हत्या किए जाने की कड़ी निंदा की है। इस घटना के सामने आने के बाद से इलाके में तनाव का माहौल है और मानवाधिकार संगठनों ने सरकार के खिलाफ आवाज उठानी शुरू कर दी है। संगठन का दावा है कि जिन दो युवकों की मौत हुई है, उन्हें कुछ महीने पहले ही जबरन गायब कर दिया गया था और बाद में सुरक्षा बलों ने उन्हें एक फर्जी मुठभेड़ में मार गिराया। इस पूरे मामले ने देश में सुरक्षा बलों की कार्रवाई और कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या है पूरा मामला और कैसे हुई घटना
संगठन द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, मारे गए युवकों के नाम Yahya Wahid Marri और Halil Sayad हैं। इनमें से याह्या वाहिद मारी की उम्र 23 साल और खलील सयाद की उम्र 28 साल थी। संगठन का आरोप है कि इन दोनों को इसी साल 5 July 2026 को बलूचिस्तान के हब चौकी इलाके में स्थित खलील सयाद के घर से जबरन उठाया गया था। इसके बाद से दोनों का कोई अता-पता नहीं था और परिवार वाले लगातार उनकी तलाश कर रहे थे। ये दोनों युवक पिछले दो महीने से ज्यादा समय से गायब चल रहे थे और उनके बारे में परिवार को कोई जानकारी नहीं दी गई थी।
सीटीडी का दावा और मानवाधिकार संगठन का पलटवार
पाकिस्तान के काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट यानी CTD का कहना है कि उन्होंने कराची के मंग्होपीर इलाके में एक सशस्त्र अभियान के दौरान इन दोनों युवकों को मार गिराया। सीटीडी अधिकारियों का यह भी दावा है कि ये दोनों प्रतिबंधित संगठन Balochistan Liberation Front यानी बीएलएफ से जुड़े हुए थे और उनके पास से हथियार भी बरामद किए गए थे। हालांकि, मानवाधिकार संगठन पांक ने इस सरकारी दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। संगठन का साफ कहना है कि ये दोनों लोग पहले से ही सुरक्षा बलों की हिरासत में थे, क्योंकि उन्हें महीनों पहले जबरन गायब किया गया था। संगठन ने इस पूरी कार्रवाई को एक फर्जी एनकाउंटर और गैर-न्यायिक हत्या बताया है।
पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की मांग
पांक संगठन का यह भी कहना है कि इस तरह की घटनाएं जबरन लोगों को गायब करने के गंभीर परिणामों को उजागर करती हैं, जहां पीड़ितों को वकीलों, अदालतों और कानून की उचित प्रक्रिया से दूर रखा जाता है। संगठन ने जोर देकर कहा है कि किसी भी व्यक्ति पर प्रतिबंधित समूह से जुड़े होने का आरोप लगाना उसे बिना किसी मुकदमे के गुप्त हिरासत में रखने या जान से मारने का लाइसेंस नहीं देता है। संगठन ने इस पूरे मामले की तत्काल, स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की है। इसके अलावा, उन्होंने मांग की है कि इसके लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान की जाए और उन्हें एक सक्षम अदालत के सामने पेश किया जाए।
संगठन ने पीड़ित परिवारों को उनके पकड़े जाने और मौत से जुड़ी पूरी जानकारी देने की भी मांग उठाई है, जिसमें पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य दस्तावेज शामिल हैं। साथ ही, संयुक्त राष्ट्र और एमनेस्टी इंटरनेशनल जैसे अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से अपील की गई है कि वे इस मामले का संज्ञान लें और पाकिस्तानी अधिकारियों से जवाब मांगें। पांक का कहना है कि याह्या वाहिद मारी और खलील सयाद के परिवारों को सच्चाई, न्याय और उचित मुआवजा पाने का पूरा अधिकार है, और कानून के तहत दोषियों को सजा मिलनी चाहिए।