बलोचिस्तान में बिगड़ती सुरक्षा: छात्राओं पर हमले के खिलाफ तुर्बत में छात्रों का जोरदार प्रदर्शन
बलोचिस्तान के तुर्बत विश्वविद्यालय में छात्राओं पर हुए हमले के खिलाफ छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया और दोषियों को सजा देने की मांग की।

तुर्बत (बलोचिस्तान): बलोचिस्तान के तुर्बत विश्वविद्यालय में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने एकत्रित होकर विरोध प्रदर्शन किया। बलोचिस्तान स्टूडेंट्स एक्शन कमेटी (BSAC) द्वारा आयोजित इस प्रदर्शन में गर्ल्स डिग्री कॉलेज नुशकी के भीतर तीन छात्राओं की गोली मारकर घायल किए जाने की घटना की कड़ी निंदा की गई और पीड़ितों के लिए न्याय की मांग की गई।
प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां लेकर इस सशस्त्र हमले का विरोध किया और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने की मांग की। इस दौरान छात्रों ने शैक्षणिक समुदाय के सदस्यों और विद्यार्थियों को मिलने वाली बढ़ती धमकियों पर गहरी चिंता जताई।
कॉलेज प्रशासन के मुताबिक, यह गोलीबारी मंगलवार, 27 अक्टूबर को हुई थी। उस समय तीन अज्ञात नकाबपोश बंदूकधारी गर्ल्स डिग्री कॉलेज नुशकी के परिसर में घुसे और छात्राओं पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी। इस हमले में तीन छात्राएं घायल हो गईं, जिसकी हर तरफ निंदा हो रही है।
घायलों में से एक छात्रा, जिसकी पहचान रुक्साना के रूप में हुई है, की हालत गंभीर होने के कारण उसे विशेष इलाज के लिए क्वेटा भेजा गया। अस्पताल के सूत्रों ने पुष्टि की है कि उसे आगे और चिकित्सा देखभाल की जरूरत है।
BSAC ने इस घटना को बेहद चिंताजनक बताया है और घायल छात्राओं को न्याय दिलाने के लिए तत्काल कार्रवाई की मांग की है। कमेटी के केंद्रीय प्रवक्ता ने कहा कि शैक्षणिक समुदाय के सदस्यों को निशाना बनाने का यह एक परेशान करने वाला सिलसिला है।
बलोचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा जैसे क्षेत्रों में जबरन गायब किए जाने और न्यायेतर हत्याओं के गंभीर आरोप पाकिस्तान पर लगते रहे हैं। एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच जैसे मानवाधिकार समूहों ने बार-बार गायब कार्यकर्ताओं, छात्रों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के मुद्दे पर चिंता जताई है, जिन्हें कथित तौर पर सुरक्षा एजेंसियों ने बिना कानूनी प्रक्रिया के हिरासत में लिया है।
लापता लोगों के परिवार अक्सर अपने प्रियजनों की जानकारी के लिए विरोध प्रदर्शन करते हैं। मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि कई पीड़ित बाद में मृत पाए जाते हैं, हालांकि अधिकारी इसमें अपनी संलिप्तता से इनकार करते हैं। इस मुद्दे ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ाई है और प्रभावित क्षेत्रों में पारदर्शी जांच और मानवाधिकारों की सुरक्षा की मांग की गई है।