बांग्लादेश में फंसी पूर्व राष्ट्रपति की पत्नी, फ्लैट धोखाधड़ी मामले में जमानत याचिका खारिज.

बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति हुसैन मोहम्मद इरशाद की दूसरी पत्नी बिदिशा इरशाद की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। एक फ्लैट की बिक्री से जुड़े पुराने धोखाधड़ी मामले में अदालत ने उनकी जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसके चलते उन्हें फिलहाल जेल में ही सलाखों के पीछे रहना होगा। इस मामले में अदालत के फैसले के बाद से कानूनी गलियारों में चर्चाओं का दौर फिर से शुरू हो गया है और उनके वकीलों ने अब उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने का फैसला किया है ताकि उन्हें कुछ राहत मिल सके।
अदालत में हुई सुनवाई और वकीलों की दलीलें
ढाका मेट्रोपॉलिटन सेशंस जज शाहजहां कबीर की अदालत में बिदिशा की ओर से ढाका बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अनवर जाहिद भुइयां समेत कई जाने-माने वकील पेश हुए थे। इन सभी वकीलों ने अदालत के सामने दलील दी कि उनकी मु मुवक्किल को जमानत दी जाए क्योंकि वह इस मामले में ऊपरी अदालत में अपील दायर करना चाहती हैं। दूसरी तरफ, शिकायतकर्ता के वकील हेमायतुद्दीन खान हिरोन ने जमानत याचिका का पुरजोर विरोध किया और अदालत को पुराने तथ्यों से अवगत कराया। दोनों पक्षों की लंबी दलीलें सुनने के बाद अदालत ने जमानत देने से साफ इनकार कर दिया। बिदिशा के दूसरे वकील मोनिरुज्ज्मान सबुज ने मीडिया को बताया कि अब उनकी कानूनी टीम न्याय पाने के लिए उच्च न्यायालय का रुख करेगी और वहां अपील दाखिल करेगी।
क्या है पूरा मामला और फ्लैट की खरीद-फरोख्त का विवाद
यह पूरा कानूनी विवाद साल 2008 का है, जब एक व्यवसायी मोशर्रफ हुसैन सिकदर ने गुलशन थाने में बिदिशा के खिलाफ औपचारिक मामला दर्ज कराया था। शिकायत में मुख्य आरोप यह लगाया गया था कि बारीधारा के प्रेसिडेंट पार्क में एक फ्लैट बेचने के नाम पर उनके साथ बड़ी धोखाधड़ी की गई है। दोनों पक्षों के बीच उस समय 80 लाख टका में फ्लैट का सौदा तय हुआ था। इसके बाद 10 जुलाई, 2001 को बिदिशा ने शिकायतकर्ता मोशर्रफ को बननी स्थित अपने रजनीगंधा ऑफिस बुलाया और उनसे कहा कि वह भुगतान का 75 लाख टका का पे-ऑर्डर उनके नॉमिनी और दोस्त अब्दुल रज्जाक के नाम पर जारी करें।
मोशर्रफ हुसैन ने स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक की कावरान बाजार शाखा के माध्यम से पूरी रकम का भुगतान कर दिया। इस भुगतान के बाद दोनों पक्षों के बीच एक औपचारिक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। समझौते में यह शर्त रखी गई थी कि बाकी बची हुई रकम का भुगतान करने और कैपिटल डेवलपमेंट अथॉरिटी यानी राजुक से जरूरी मंजूरी मिलने के बाद फ्लैट की आधिकारिक रजिस्ट्री कर दी जाएगी। शिकायतकर्ता का यह मुख्य आरोप रहा कि 10 जुलाई 2002 तक हर हाल में फ्लैट सौंपने का वादा किया गया था, लेकिन लंबा समय बीत जाने के बाद भी उन्हें फ्लैट का कब्जा नहीं दिया गया।
बाउंस हुआ चेक और गिरफ्तारी की पूरी कहानी
जब व्यवसायी मोशर्रफ ने फ्लैट का कब्जा देने के लिए दबाव बनाया, तो बिदिशा ने पैसे वापस लौटाने का आश्वासन दिया। आरोप है कि 9 फरवरी 2005 को उन्होंने 72 लाख टका का एक चेक जारी किया, लेकिन जब उस चेक को बैंक में जमा किया गया तो बैंक खाते में पर्याप्त राशि न होने के कारण वह चेक बाउंस हो गया। शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि इसके बाद बिदिशा ने तरह-तरह के बहाने बनाकर मामले को लटकाए रखा और न तो पैसे वापस किए और न ही फ्लैट सौंपा। इतना ही नहीं, शिकायत में यह गंभीर आरोप भी लगाया गया कि पैसे मांगने पर उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई थी।
इस मामले की लंबी सुनवाई के बाद इसी साल 20 मई को अदालत ने बिदिशा को दोषी मानते हुए दो साल की जेल और 10 हजार टका यानी लगभग 7,732 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी। सजा के ऐलान के समय बिदिशा अदालत में मौजूद नहीं थीं और फरार चल रही थीं, जिसके बाद अदालत ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया था। आखिरकार पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 25 अगस्त की रात करीब 8:30 बजे गुलशन इलाके के एक रेस्तरां से उन्हें धर दबोचा। गिरफ्तारी के अगले दिन उन्हें ढाका की मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें सीधे जेल भेज दिया गया था और अब उनकी जमानत याचिका भी खारिज कर दी गई है।