जिनेवा में उठा बांग्लादेश का संवैधानिक संकट, विशेषज्ञों ने जताई गहरी चिंता

स्विट्जरलैंड के जिनेवा शहर में संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार सत्र के दौरान बांग्लादेश के मौजूदा हालात को लेकर एक विशेष सेमिनार का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में वक्ताओं ने देश में जारी राजनीतिक उथल-पुथल, संवैधानिक संकट और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर मंडराते खतरों को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की।
गंभीर स्थिति और लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन
'बांग्लादेश में संवैधानिक संकट' विषय पर आयोजित इस सेमिनार में साउथ एशिया डेमोक्रेटिक फोरम (एसएडीएफ) के कार्यकारी निदेशक पाउलो कासाका ने देश के हालात को बेहद चिंताजनक बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान में देश एक असंवैधानिक सरकार के अधीन चल रहा है, जहां राजनीतिक विपक्षी दलों को प्रतिबंधित किया जा रहा है।
कासाका ने पत्रकारों और आम नागरिकों के उत्पीड़न, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर पाबंदियों और शिक्षा क्षेत्र में हो रहे बदलावों का भी जिक्र किया। उन्होंने यह भी कहा कि देश की मौजूदा आर्थिक स्थिति सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारियों को पूरा करने में सक्षम नहीं दिखाई दे रही है।
शीर्ष नेतृत्व की वापसी पर चर्चा
सेमिनार के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की दिसंबर में बांग्लादेश लौटने की घोषणा पर भी चर्चा हुई। पाउलो कासाका ने इसे एक साहसी कदम करार देते हुए कहा कि उनकी वापसी से देश की रुकी हुई संवैधानिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
कार्यक्रम में शामिल मानवाधिकार कार्यकर्ता रहमान खलीलुर मामून ने मुख्य राजनीतिक दल पर लगाए गए प्रतिबंधों को अनुचित और अलोकतांत्रिक बताया। उन्होंने बताया कि इस अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में विभिन्न देशों के विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया और बांग्लादेश में लोकतंत्र की बहाली के लिए वैश्विक स्तर पर अधिक ध्यान देने की अपील की।