बांग्लादेश में डेंगू का तांडव: बढ़ती मौतों से मचा हड़कंप, अब तक 245 की गई जान

Gautam Sahu30 September 20262 min read0 viewsWorld
बांग्लादेश में डेंगू का तांडव: बढ़ती मौतों से मचा हड़कंप, अब तक 245 की गई जान

बांग्लादेश में डेंगू का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है। स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस साल डेंगू से होने वाली मौतों का कुल आंकड़ा बढ़कर 245 हो गया है। 30 सितंबर तक की रिपोर्ट के अनुसार, स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है और संक्रमण के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है।

सितंबर बना सबसे घातक महीना

डेंगू से होने वाली मौतों के मामले में सितंबर का महीना साल का सबसे विनाशकारी महीना साबित हुआ है। कुल 245 मौतों में से 148 मौतें अकेले सितंबर महीने में दर्ज की गई हैं। स्वास्थ्य विभाग (DGHS) के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 24 घंटों के भीतर ही छह लोगों ने दम तोड़ दिया, जिनमें तीन पुरुष और तीन महिलाएं शामिल थीं। मरने वालों की उम्र 6 से 45 वर्ष के बीच थी, जो यह दर्शाता है कि यह बीमारी बच्चों और वयस्कों दोनों के लिए समान रूप से घातक साबित हो रही है।

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बढ़ते मामलों और अस्पतालों में भीड़ का आलम

संक्रमण की लहर इतनी तेज है कि अस्पतालों में मरीजों का आना लगातार जारी है। 2026 की शुरुआत से अब तक कुल 79,620 लोग डेंगू से संक्रमित हो चुके हैं। केवल पिछले 24 घंटों के भीतर ही देशभर के विभिन्न अस्पतालों में 1,948 नए मरीजों को भर्ती कराया गया है। हालांकि, राहत की बात यह है कि अब तक 73,890 मरीज इस बीमारी से उबर चुके हैं और ठीक होकर घर लौट रहे हैं।

क्षेत्रीय स्थिति: कहाँ है सबसे ज्यादा असर?

डेंगू का असर बांग्लादेश के लगभग हर हिस्से में देखा जा रहा है। सितंबर के अंत तक दर्ज किए गए आंकड़ों के अनुसार, विभिन्न डिवीजनों में स्थिति इस प्रकार है:

  • चटगांव: 343 मामले
  • ढाका डिवीजन: 320 मामले
  • खुल्ना: 248 मामले (यहाँ अब तक 48 मौतें हो चुकी हैं)
  • बारिशाल: 212 मामले
  • राजशाही: 211 मामले
  • ढाका उत्तर और दक्षिण नगर निगम: क्रमशः 189 और 210 मामले

सरकार और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी

इस संकट को देखते हुए प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने पहले ही स्वच्छता अभियानों और जन जागरूकता बढ़ाने के निर्देश दिए थे। स्वास्थ्य विशेषज्ञों, जिनमें मुश्ताक हुसैन भी शामिल हैं, ने चेतावनी दी है कि केवल तात्कालिक उपाय काफी नहीं हैं। उन्होंने एडीज मच्छरों के प्रजनन स्थलों को खत्म करने के लिए दीर्घकालिक और टिकाऊ वेक्टर नियंत्रण कार्यक्रमों की आवश्यकता पर जोर दिया है।

इस आपदा से निपटने के लिए बांग्लादेश रेड क्रिसेंट सोसाइटी ने भी अपने स्वयंसेवकों को तैनात कर दिया है, जो सामुदायिक स्वास्थ्य और स्वच्छता के क्षेत्र में सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।

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