बांग्लादेश में दुर्गा पंडाल की मूर्तियां खंडित

बांग्लादेश में धार्मिक सौहार्द को बिगाड़ने वाली एक निंदनीय घटना सामने आई है। देश के तंगेल जिले में असामाजिक तत्वों ने आगामी दुर्गा पूजा के लिए तैयार की जा रही मूर्तियों को निशाना बनाया है। इस घटना के बाद से स्थानीय हिंदू समुदाय में गहरी चिंता और असुरक्षा का माहौल पैदा हो गया है, जबकि पुलिस प्रशासन ने मामले की जांच और सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया है।
तंगेल जिले में शरारती तत्वों की करतूत
घटना तंगेल जिले के मिर्जापुर उप जिले के अंतर्गत आने वाले जमुर्की पश्चिमपाड़ा की है। यहां स्थित एक स्थानीय मंदिर में दुर्गा पूजा के पावन अवसर के लिए भव्य तैयारियां चल रही थीं। जमुर्की आर्य समिति की देखरेख में इस मंदिर में पिछले लगभग 85 वर्षों से पारंपरिक रूप से दुर्गा पूजा का आयोजन किया जाता रहा है। इस वर्ष भी उत्सव की तैयारियां जोरों पर थीं और पंडाल के भीतर माता दुर्गा सहित कुल सात मूर्तियां लगभग तैयार कर ली गई थीं। केवल उन पर रंग-रोगन का अंतिम कार्य बाकी रह गया था।
मंदिर समिति के पदाधिकारियों के अनुसार, बुधवार की रात को हमेशा की तरह सभी लोग रात करीब 10:00 बजे मंदिर बंद करके अपने घरों को लौटे थे। लेकिन जब गुरुवार की तड़के सुबह लोग दोबारा मंदिर पहुंचे, तो वहां का दृश्य देखकर उनके होश उड़ गए। असामाजिक तत्वों ने चुपचाप मंदिर में घुसकर पंडाल में रखी सातों मूर्तियों को तोड़कर बुरी तरह खंडित कर दिया था।
प्रशासन का आश्वासन और पुलिस जांच
इस हृदयविदारक घटना की जानकारी मिलते ही इलाके में सनसनी फैल गई। जमुर्की आर्य समिति के अध्यक्ष प्रकाश बकाली ने मीडिया को बताया कि उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि इस घृणित कृत्य के पीछे किसका हाथ है। मंदिर समिति की ओर से इस मामले में स्थानीय पुलिस थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज करा दी गई है। समिति ने मांग की है कि इस साजिश में शामिल दोषियों को जल्द से जल्द बेनकाब किया जाए और कानून के तहत कड़ी सजा दी जाए।
घटना की गंभीरता को देखते हुए तंगेल के पुलिस अधीक्षक मोहम्मद शम्सुल आलम सरकार समेत कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने मौके का मुआयना किया और हिंदू समुदाय के लोगों से बातचीत कर उन्हें पूरी सुरक्षा और न्याय का भरोसा दिलाया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि असामाजिक तत्वों की पहचान के लिए आसपास के इलाकों और संदिग्ध गतिविधियों की बारीकी से जांच की जा रही है।
कोलकाता में विरोध प्रदर्शन और रिहाई की मांग
इस घटना के तूल पकड़ने के बीच पड़ोसी देश भारत में भी विरोध के स्वर उठे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, कोलकाता में बांग्लादेश उप उच्च आयोग के बाहर लगभग सौ लोगों का एक समूह इकट्ठा हुआ और जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने हिंदू संत चिन्मय कृष्ण दास की तत्काल रिहाई की मांग उठाई, जो वर्ष 2024 से बांग्लादेश की जेल में बंद हैं।
विवेकानंद मिशन सेवा प्रतिष्ठान और नेशनल सिटिजन पार्टी ऑफ इंडिया के बैनर तले सियालदह रेलवे स्टेशन से शुरू हुआ यह जुलूस जब बांग्लादेश उप उच्च आयोग के पास पहुंचा, तो पुलिस ने सुरक्षा कारणों से उसे रोक लिया। हालांकि, अधिकारियों ने प्रतिनिधिमंडल के कुछ सदस्यों को ज्ञापन सौंपने की अनुमति दी। ज्ञापन सौंपने वाले प्रतिनिधियों ने एक तरफ जहां दुर्गा पूजा के लिए छुट्टियों और फंड बढ़ाने के कदमों की सराहना की, वहीं दूसरी तरफ बांग्लादेश सरकार से यह पुरजोर आग्रह किया कि दुर्गा पूजा के दौरान और उसके बाद भी देश के हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पुख्ता की जाए।