बांग्लादेश: कड़ी सुरक्षा में दुर्गा पूजा, अल्पसंख्यक संगठन ने बताया दुखद

Gautam Sahu14 October 20262 min read0 viewsWorld
बांग्लादेश: कड़ी सुरक्षा में दुर्गा पूजा, अल्पसंख्यक संगठन ने बताया दुखद

ढाका (बांग्लादेश): बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद (BHBCUC) ने देश भर में शारदीय दुर्गा पूजा के आयोजनों के लिए पुलिस, ड्रोन और राजनीतिक दलों के नेताओं तथा कार्यकर्ताओं की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था को "दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण" बताया है। परिषद ने एक बयान में कहा कि ऐसे हालात से अल्पसंख्यक पूजा करने वालों की धार्मिक स्वतंत्रता पर असर पड़ रहा है।

परिषद के मुताबिक इस तरह की स्थिति से बांग्लादेश की अंतरराष्ट्रीय छवि को भी गंभीर नुकसान पहुंच रहा है, जो किसी भी तरह वांछनीय नहीं है। बयान में कहा गया है कि त्योहार जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, सांप्रदायिक तत्वों की गतिविधियां भी तेज होती दिख रही हैं।

परिषद ने जुलाई से सितंबर तक के तीन महीनों में दर्ज घटनाओं का आंशिक ब्योरा दिया है। इसके अनुसार कम से कम 141 घटनाएं सामने आईं, जिनमें 16 हत्याएं शामिल हैं। बयान में 4 बलात्कार और यौन उत्पीड़न के मामले, मंदिरों पर हमले और लूटपाट, जमीन कब्जे और धार्मिक मूर्तियों की तोड़फोड़ से जुड़ी 36 घटनाएं, और आदिवासी समुदायों पर 7 हमलों का जिक्र है।

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बयान में घरों और कारोबारी प्रतिष्ठानों पर हमले, लूट और तोड़फोड़ की 11 घटनाएं गिनाई गई हैं। मारपीट, छीना-झपटी, लूट और शारीरिक हिंसा के 26 मामले भी दर्ज हुए हैं। इसके अलावा जमीन और संपत्ति पर कब्जे के 14, अपहरण, जान से मारने की धमकी और उत्पीड़न के 3, जबरन वसूली के 4 मामले और धार्मिक मानहानि के आरोप में 6 गिरफ्तारियों का उल्लेख है।

परिषद ने 12 अक्टूबर की शाम करीब आठ बजे की एक घटना का भी जिक्र किया। बयान के अनुसार जगन्नाथ विश्वविद्यालय परिसर में स्थित एक मंदिर की ईंटों का इस्तेमाल करके, मंदिर के सामने गोमांस के साथ खिचड़ी पकाने का प्रयास किया गया। परिषद ने आरोप लगाया कि एक गुट ने ऐसा सांप्रदायिक तनाव भड़काने और धार्मिक भावनाओं को आहत करने के लिए किया।

बयान में सोशल मीडिया पर धार्मिक भड़काऊ और नफरत भरी टिप्पणियों के लगातार फैलाए जाने पर भी चिंता जताई गई है। परिषद के अनुसार ऑनलाइन प्रचार के जरिए सांप्रदायिक तनाव भड़काने की कोशिशें जारी हैं।

परिषद ने शिकायत की कि इन घटनाओं के सिलसिले में अब तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है और न ही किसी को न्याय के कटघरे में लाया गया है। परिषद के मुताबिक इससे दोषियों के हौसले बढ़ रहे हैं और वे अपनी आपराधिक गतिविधियां जारी रखे हुए हैं।

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