भारत-बांग्लादेश रिश्ते हैं बेहद मजबूत, उच्च आयुक्त रियाज हामिदुलुल्लाह ने कही बड़ी बात.

नई दिल्ली में हाल ही में बांग्लादेश के उच्च आयुक्त रियाज हामिदुलुल्लाह ने भारत और बांग्लादेश के संबंधों को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने दोनों देशों के बीच के रिश्तों को कार्बनिक यानी स्वाभाविक और आपसी निर्भरता पर आधारित बताया है। उन्होंने साफ कहा कि दोनों देशों के बीच विचारों और तरीकों में कुछ मतभेद हो सकते हैं, लेकिन इसके कारण आपसी बातचीत और संवाद का सिलसिला बिल्कुल नहीं रुकना चाहिए।
एएनआई को दिए गए एक इंटरव्यू में हामिदुलुल्लाह ने बताया कि दोनों देशों की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि आपस में जुड़ाव रहना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारत और बांग्लादेश के लोग एक-दूसरे के बहुत करीब हैं और यही वजह है कि दोनों देशों के बीच लगातार बातचीत होना बेहद आवश्यक है। यह रिश्ता पूरी तरह से दोनों देशों के साझा हितों से जुड़ा हुआ है।
आपसी मतभेदों पर क्या बोले उच्च आयुक्त
उच्च आयुक्त ने यह भी माना कि जब दो देश एक-दूसरे के इतने करीब होते हैं और उनकी सीमाएं आपस में मिलती हैं, तो विचारों में थोड़ा अंतर होना बहुत आम बात है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग नजरिए और सोच होना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, लेकिन इन छोटी-मोटी बातों की वजह से दोनों देशों को अपनी बातचीत बंद नहीं करनी चाहिए, बल्कि संवाद को हमेशा जारी रखना चाहिए।
इसके अलावा, उन्होंने दोनों देशों के आम नागरिकों के बीच मेल-जोल बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि खासकर छात्र-छात्राओं, स्कूलों के बच्चों और विश्वविद्यालयों के युवाओं के बीच आपसी संवाद को और ज्यादा बढ़ावा देने की जरूरत है। अगर इस दिशा में काम किया जाए तो यह जुड़ाव लाखों लोगों तक पहुंच सकता है और दोनों देशों के रिश्तों में एक बहुत बड़ा और सकारात्मक बदलाव ला सकता है.
इलिश फेस्टिवल और सांस्कृतिक मेलजोल
सांस्कृतिक रिश्तों पर बात करते हुए हामिदुलुल्लाह ने वार्षिक इलिश फेस्ट का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह त्योहार सिर्फ खाने-पीने और खान-पान की संस्कृति का जश्न मनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भोजन और संस्कृति के जरिए लोगों को एक-पास लाने का एक बेहतरीन जरिया है। उन्होंने हंसते हुए कहा कि इलिश मछली का नाम सुनते ही बंगाल का हर व्यक्ति, चाहे वह बांग्लादेश का हो या भारत के किसी भी हिस्से का, खुशी से झूम उठता है।
उन्होंने आगे बताया कि इस साल 27 सितंबर को इस फेस्टिवल का आयोजन किया गया था। ठीक एक साल पहले भी इसी तारीख को बांग्लादेश उच्च आयोग ने पहली बार इस कार्यक्रम की मेजबानी की थी। उनका मानना है कि इस तरह के आयोजनों से लोगों के बीच की दूरियां कम होती हैं, बातचीत के नए रास्ते खुलते हैं और आपसी गलतफहमियां दूर होकर एकता की भावना पैदा होती है।
दिल्ली में कार्यकाल का अनुभव
दिल्ली में अपने डेढ़ साल के कार्यकाल को पूरा करने के करीब पहुंच चुके हामिदुलुल्लाह ने इस आयोजन को भारतीय समाज के अलग-अलग वर्गों के प्रति आभार व्यक्त करने का एक छोटा सा तरीका बताया। उन्होंने कहा कि भारत के समाज, अर्थव्यवस्था और राजनीति से जुड़े कई जाने-माने लोग इस कार्यक्रम में शामिल हुए, जिससे इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य पूरा हुआ कि लोग एक मंच पर आ सकें। इस दौरान उनके साथ मणिशंकर अय्यर, एमजे अकबर, सैयदा हमीद, ज्योति मल्होत्रा और आशिष नंदी जैसी कई दिग्गज हस्तियां भी मौजूद थीं, जिन्होंने इस कार्यक्रम को और भी खास बना दिया।