बांग्लादेश में गारमेंट कामगारों का नया वेतन 1 दिसंबर से लागू होगा, जनवरी में मिलेगा

बांग्लादेश में गारमेंट फैक्ट्री मालिकों और श्रमिकों के बीच नए वेतन ढांचे पर सहमति बनी। जानें कब से लागू होगा नया वेतन।

Gautam Sahu4 November 20262 min read0 viewsWorld
बांग्लादेश में गारमेंट कामगारों का नया वेतन 1 दिसंबर से लागू होगा, जनवरी में मिलेगा

ढाका (बांग्लादेश): बांग्लादेश के रेडीमेड गारमेंट (RMG) सेक्टर में फैक्ट्री मालिकों और श्रमिकों के प्रतिनिधियों ने नए न्यूनतम वेतन ढांचे को 1 दिसंबर से लागू करने पर सहमति जताई है। इस फैसले के मुताबिक, बढ़ी हुई सैलरी का भुगतान जनवरी में दिसंबर के वेतन के साथ किया जाएगा।

यह निर्णय राजधानी के सेगुनबगीचा स्थित बोर्ड कार्यालय में आरएमजी वर्कर्स के लिए आठवें न्यूनतम वेतन बोर्ड की पहली बैठक के बाद लिया गया। बांग्लादेश गारमेंट्स एंड इंडस्ट्रियल वर्कर्स फेडरेशन के महासचिव और श्रमिक प्रतिनिधि बाबुल अख्तर ने पत्रकारों को बताया कि दोनों पक्ष 1 दिसंबर से नए वेतन ढांचे को लागू करने और जनवरी में संशोधित वेतन देने पर सहमत हुए हैं।

बोर्ड की इस पहली बैठक में न्यूनतम वेतन की सटीक राशि तय नहीं की गई है। इस पर आने वाली बैठकों में चर्चा की जाएगी। फिलहाल बांग्लादेश में गारमेंट वर्कर्स के लिए न्यूनतम वेतन 12,500 टका प्रति माह है, जिसे बढ़ाकर श्रमिक 30,000 टका प्रति माह करने की मांग कर रहे हैं।

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श्रमिकों की यह मांग इसलिए बढ़ी है क्योंकि बांग्लादेश सरकार ने हाल ही में सरकारी कर्मचारियों के लिए नया वेतनमान घोषित किया है, जिससे उनकी सैलरी और लाभ लगभग दोगुने हो गए हैं। इसके जवाब में गारमेंट वर्कर्स भी अपनी न्यूनतम सैलरी 30,000 टका करने पर जोर दे रहे हैं।

दूसरी तरफ, फैक्ट्री मालिकों का कहना है कि ऑर्डर्स में कमी आई है और कीमतों में बढ़ोतरी नहीं हुई है। साथ ही कच्चे माल के आयात की लागत अधिक होने के कारण इतनी बड़ी मांग को पूरा करना उनके लिए मुश्किल है। इसी गतिरोध को देखते हुए सरकार ने नया वेतन बोर्ड गठित किया है, हालांकि इसके बावजूद श्रमिक सड़कों पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

बांग्लादेश का रेडीमेड गारमेंट उद्योग 1970 के दशक के अंत और 1980 के दशक की शुरुआत में शुरू हुआ था। आज यह दुनिया के सबसे बड़े गारमेंट निर्यातकों में से एक है और देश की कुल निर्यात कमाई में इसका हिस्सा 80 प्रतिशत से अधिक है। इस क्षेत्र में करीब 40 लाख लोग सीधे तौर पर काम करते हैं, जिनमें 60 से 70 प्रतिशत महिलाएं हैं।

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