वेतन वृद्धि के लिए बांग्लादेश में गारमेंट वर्करों का हंगामा, 529 फैक्ट्रियां ठप
वेतन वृद्धि की मांग को लेकर बांग्लादेश के गारमेंट वर्करों और पुलिस के बीच झड़प। 5 लाख से ज्यादा कर्मचारी काम छोड़कर उतरे।

ढाका: बांग्लादेश में कम वेतन और बढ़ती महंगाई के खिलाफ गारमेंट वर्करों का गुस्सा फूट पड़ा है। 1 नवंबर, 2026 को ढाका और उसके आसपास के औद्योगिक इलाकों में दर्जनों मजदूरों की पुलिस के साथ हिंसक झड़प हुई। यह विरोध प्रदर्शन गाजीपुर, मयमनसिंह और सावर-अशुलिया जैसे इलाकों में तेजी से फैला, जहां प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव हुआ।
भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस, वॉटर कैनन और साउंड ग्रेनेड का इस्तेमाल किया। इस दौरान गाजीपुर में एक पुलिस बॉक्स को तोड़ दिया गया और मीरपुर में एक वाहन को आग के हवाले कर दिया गया। कई फैक्ट्रियों में भी तोड़फोड़ की खबरें सामने आई हैं।
बांग्लादेश गारमेंट मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (BGMEA) ने बताया कि इस अशांति के कारण 529 फैक्ट्रियों का कामकाज ठप हो गया। एक ही दिन में करीब 9,87,190 कर्मचारी अपनी पोस्ट छोड़कर प्रदर्शन में शामिल हुए।
मजदूरों की मुख्य मांग न्यूनतम मासिक वेतन को 12,500 टका से बढ़ाकर 30,000 टका (लगभग 245 डॉलर) करने की है। उनका कहना है कि भोजन, आवास और स्वास्थ्य सेवाओं का खर्च बहुत बढ़ गया है, इसलिए वेतन में यह वृद्धि जरूरी है। इसके अलावा, प्रदर्शनकारियों ने बर्खास्त कर्मचारियों को वापस काम पर रखने और ब्लैकलिस्टिंग खत्म करने की मांग भी की है।
टैक्सटाइल उद्योग बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, जिससे देश की कुल निर्यात कमाई का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आता है और इसमें करीब 40 लाख लोग कार्यरत हैं।
अक्टूबर के अंत से बढ़ते तनाव को देखते हुए सरकार ने वेतन ढांचे की समीक्षा के लिए छह सदस्यीय न्यूनतम वेतन बोर्ड के गठन की घोषणा की है। श्रम और रोजगार मंत्री आरिफुल हक चौधरी ने मजदूरों से काम पर लौटने की अपील की है। उन्होंने कहा कि प्रशासन उनकी शिकायतों को पूरी गंभीरता से ले रहा है और नए बोर्ड में वर्कर प्रतिनिधियों को भी शामिल किया गया है।
हालात को नियंत्रित करने के लिए संवेदनशील औद्योगिक क्षेत्रों में बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) के जवानों को तैनात किया गया है। सुरक्षा के ये कड़े इंतजाम 7 नवंबर तक जारी रहेंगे।