गंगा जल बंटवारा: बांग्लादेश ने भारत से मांगा नया समझौता या संशोधित डील

भारत और बांग्लादेश के बीच दशकों पुराना गंगा जल बंटवारा समझौता अब एक निर्णायक मोड़ पर है। बांग्लादेश ने स्पष्ट किया है कि वह दिसंबर 2026 में समाप्त होने वाली मौजूदा संधि के नवीनीकरण या एक नए समझौते की उम्मीद करता है। ढाका की मुख्य मांग यह है कि नए समझौते में पानी के हिस्से की एक स्पष्ट गारंटी शामिल हो, ताकि भविष्य में पानी की उपलब्धता को लेकर कोई अनिश्चितता न रहे।
बांग्लादेश के जल संसाधन मंत्री शाहिद उद्दीन चौधरी अन्नी ने पत्रकारों से बात करते हुए बताया कि देश चाहता है कि आगामी समझौते में वैसी ही गारंटी हो जैसी 1977 के इंतजाम में थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि 1996 में हस्ताक्षरित 30 साल की संधि में ऐसी किसी गारंटी क्लॉज (शर्त) का जिक्र नहीं था, जिसे अब शामिल करना जरूरी है।
राजनयिक बातचीत और अंतरराष्ट्रीय कानून का सहारा
बांग्लादेश सरकार इस संवेदनशील मुद्दे को बातचीत और कूटनीति के जरिए सुलझाना चाहती है। विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कोबीर ने एक सेमिनार के दौरान कहा कि उन्हें उम्मीद है कि चर्चा और डिप्लोमेसी के माध्यम से इस समस्या का समाधान निकल जाएगा। उन्होंने जल बंटवारे के संबंध में अंतरराष्ट्रीय कानूनों का भी हवाला दिया और कहा कि बांग्लादेश की चुनी हुई सरकार देश के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और वह उतना ही मांगेगी जितना देश के लिए जरूरी है और भारत के लिए स्वीकार्य होगा।
कोबीर ने आगे बताया कि बांग्लादेश के संयुक्त नदी आयोग और संयुक्त जल आयोग ने पहले ही अपने भारतीय समकक्षों के साथ बैठक और संवाद की इच्छा जताई है। उन्होंने विश्वास जताया कि जल्द ही बातचीत शुरू होगी, जिससे 2026 की समयसीमा से पहले एक ठोस नतीजे पर पहुंचा जा सके।
गौरतलब है कि भारत और बांग्लादेश के बीच कुल 54 साझा नदियां हैं, लेकिन गंगा ही एकमात्र ऐसी नदी है जिसके लिए दोनों देशों के बीच 30 साल की एक औपचारिक जल-साझाकरण संधि मौजूद है। अब ढाका की कोशिश है कि इस ढांचे को और अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाया जाए।