Bangladesh: जमात नेता अबुल कलाम आजाद की मौत की सजा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टली

Sushma Kumari8 September 20263 min read31 viewsWorld
Bangladesh: जमात नेता अबुल कलाम आजाद की मौत की सजा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टली

बांग्लादेश में 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में सजा पाए जमात-ए-इस्लामी के नेता मौलाना अबुल कलाम आजाद की अपील पर सुनवाई एक बार फिर टाल दी गई है। उच्चतम न्यायालय ने इस बात पर विचार करने के लिए सुनवाई तय की थी कि क्या उनकी अपील सुनवाई के योग्य है या नहीं, लेकिन अदालत ने इसे आगे बढ़ा दिया। ढाका ट्रिब्यून अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, न्यायमूर्ति मोहम्मद रेजौल हक की अध्यक्षता वाली चार सदस्यीय बेंच ने मंगलवार को इस मामले की सुनवाई स्थगित करने का फैसला लिया। इस कानूनी प्रक्रिया में अदालत कक्ष के भीतर दोनों पक्षों के वकीलों ने अपनी दलीलें रखीं। मौलाना अबुल कलाम आजाद की ओर से अदालत में वरिष्ठ वकील एहसान ए सिद्दीकी पेश हुए, जिन्होंने उनका पक्ष रखा। दूसरी ओर, सरकार और पीड़ित पक्षों की पैरवी कर रहे मुख्य अभियोजन पक्ष की तरफ से मोहम्मद अमीनुल इस्लाम अदालत में उपस्थित रहे। सुनवाई के दौरान अपीलेट डिवीजन ने मुख्य अभियोजन पक्ष को इस चरण में लंबित मामले पर सार्वजनिक रूप से टिप्पणी करने से बचने की सख्त चेतावनी दी।

अदालत की छुट्टियां और नई तारीख

सुनवाई के दौरान मुख्य अभियोजक मोहम्मद अमीनुल इस्लाम ने अदालत को जानकारी दी कि अपीलेट डिवीजन आगामी 16 सितंबर से 24 अक्टूबर तक देश की छुट्टियों के कारण बंद रहेगा। अदालत के कामकाज में छुट्टियों के इस लंबे अंतराल के कारण, न्यायपीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए करीब चार हफ्ते बाद की नई तारीख तय करने का निर्णय लिया। अदालत के इस फैसले से मामले के निपटारे में थोड़ा और समय लग गया है, जिससे सभी पक्षों को अभी और इंतजार करना होगा। साल 21 जनवरी, 2013 को इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी के पूर्व सदस्य मौलाना अबुल कलाम आजाद को 1971 के मुक्ति संग्राम के दिनों में मानवता के खिलाफ किए गए गंभीर अपराधों का दोषी माना था। उस समय उनकी गैरमौजूदगी में अदालत ने उन्हें मौत की सजा सुनाई थी। खास बात यह है कि मुक्ति संग्राम के दौरान हुए अपराधों से जुड़े मामलों में इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल की तरफ से सुनाया गया यह अपने आप में पहला ऐतिहासिक फैसला था, जिसने देश भर में काफी चर्चा बटोरी थी।

फरार रहने के बाद किया था आत्मसमर्पण

फैसला आने के बाद मौलाना अबुल कलाम आजाद लंबे समय तक कानून की पकड़ से दूर रहे और वर्षों तक फरार घोषित रहे। हालांकि, इस साल 21 जनवरी को उन्होंने नाटकीय रूप से इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल के सामने खुद आकर आत्मसमर्पण कर दिया था। उनके आत्मसमर्पण करने से पहले देश के तत्कालीन राष्ट्रपति ने उनकी मौत की सजा को एक साल के लिए इस विशेष शर्त पर निलंबित कर दिया था कि वे अदालत के सामने सरेंडर करेंगे और अपनी सजा के खिलाफ उचित कानूनी अपील दायर करेंगे। इसी शर्त के तहत उन्होंने समर्पण किया और अब उनकी अपील की स्वीकार्यता पर अदालत में कानूनी दस्तावेजों और तर्कों के आधार पर सुनवाई चल रही है। अदालत यह तय करने में जुटी है कि इस अपील को मुख्य सुनवाई के लिए स्वीकार किया जाए या नहीं, जिस पर आने वाले हफ्तों में फिर से सुनवाई होने की उम्मीद है।

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