बांग्लादेश में विद्रोह के दौरान लूटे गए हथियार पहुंचे अपराधियों के पास, हजार से ज्यादा गायब

Nura Basta20 September 20263 min read19 viewsWorld
बांग्लादेश में विद्रोह के दौरान लूटे गए हथियार पहुंचे अपराधियों के पास, हजार से ज्यादा गायब

बांग्लादेश में साल 2024 के दौरान हुए छात्र-जन विद्रोह के समय देश के अलग-अलग थानों से हजारों की संख्या में हथियार और गोला-बारूद लूट लिए गए थे। इन खतरनाक हथियारों को वापस पाने के लिए सुरक्षा एजेंसियां लगातार कोशिश कर रही हैं, लेकिन अभी भी हजारों की संख्या में हथियार अपराधियों के हाथों में सुरक्षित हैं। पुलिस मुख्यालय से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार इस बड़ी घटना ने पूरे देश की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और आम लोगों के बीच डर का माहौल बना हुआ है।

थानों से कितने हथियार लूटे गए थे और अब तक कितने बरामद हुए

पुलिस विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 5 अगस्त 2024 को देश भर के विभिन्न थानों से कुल 5,763 हथियार लूटे गए थे। इसके साथ ही लगभग 6,52,008 राउंड गोला-बारूद भी असामाजिक तत्वों द्वारा चुरा लिया गया था। प्रशासन और कानून लागू करने वाली एजेंसियों ने सख्ती दिखाते हुए 14 सितंबर तक इनमें से 4,457 हथियारों को सुरक्षित बरामद कर लिया है, जबकि अभी भी 1,306 हथियार पुलिस की पहुंच से दूर हैं। वहीं दूसरी ओर गोला-बारूद की बात करें तो कुल लूट का आंकड़ा बड़ा था जिसमें से 3,94,895 राउंड वापस मिल चुके हैं, लेकिन 2,57,113 राउंड कारतूस अभी भी गायब हैं जिनका गलत इस्तेमाल होने का खतरा बना हुआ है।

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अपराधियों के पास कैसे पहुंचे ये हथियार

खुफिया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार थानों से इन हथियारों और गोलियों को मुख्य रूप से किशोर गैंग के सदस्यों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने लूटा था। बाद में पैसों के लालच में आकर इनमें से कई हथियारों को बहुत ही कम कीमतों पर पेशेवर आपराधिक समूहों को बेच दिया गया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कुछ मामलों में तो लूटी गई पिस्तौल मात्र 50,000 टका में बेचे जाने के सुबूत भी सामने आए हैं। अब इन हथियारों का इस्तेमाल खुलेआम हत्या, जबरन वसूली, झपटमारी, डकैती, ड्रग्स के अवैध कारोबार और जमीन हड़पने जैसे गंभीर अपराधों में किया जा रहा है। ये हथियार अब लुटेरों, अपहरणकर्ताओं और जंगल में लूटपाट करने वालों तक भी पहुंच चुके हैं।

पुलिस की कार्रवाई और बरामदगी के मामले

सुरक्षा एजेंसियों ने इन गायब हथियारों की तलाश तेज कर दी है और कई जगहों पर छापेमारी की जा रही है। हाल ही में 26 अगस्त को चटगांव के कुख्यात अपराधी मुबारक हुसैन जिसे 'गलाकाटा मुबारक' के नाम से जाना जाता है, को पकड़ने के लिए एक ऑपरेशन चलाया गया था। जांच में सामने आया कि जिस पिस्तौल से उसने पुलिस पर गोली चलाई थी, वह असल में 5 अगस्त 2024 को चटगांव के कोतवाली पुलिस स्टेशन से लूटी गई थी। पूछताछ में मुबारक ने बताया कि उसे यह हथियार किसी अन्य अपराधी से मिला था, जिससे साफ होता है कि लूट के बाद यह हथियार कई हाथों से गुजर चुका था। एक अन्य घटना में मीरपुर और सैयदबाद बस टर्मिनल इलाके में नारकोटिक्स कंट्रोल डिपार्टमेंट के इंस्पेक्टर को गोली मारने वाले ड्रग डीलर 'ऑटो सजल' को गिरफ्तार किया गया। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने स्वामीबाग के एक किराए के मकान से विदेशी पिस्तौल, मैगजीन, कारतूस और हेरोइन बरामद की। आरोपी ने स्वीकार किया कि ये हथियार अगस्त महीने में वारी पुलिस स्टेशन से लूटे गए थे। इसके अलावा पिछले शनिवार को पुलिस ने अराइहजार बाजार सेंट्रल जामा मस्जिद की दूसरी मंजिल से भी एक पिस्तौल, मैगजीन और कारतूस बरामद किए जो उसी विद्रोह के दौरान लूटे गए थे।

एसआरबी की विशेष टीम और जनता से अपील

बचे हुए हथियारों को जल्द से जल्द वापस पाने के लिए सरकार ने 9 सितंबर को स्पेशल रिस्पॉन्स बटालियन यानी SRB को इसकी विशेष जिम्मेदारी सौंपी है। एसआरबी के वरिष्ठ अधिकारी विंग कमांडर एजेडएम एंटेखाब चौधरी ने जनता से आगे आने और सहयोग करने की अपील की है। ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, प्रशासन ने जानकारी देने वाले नागरिकों को उचित इनाम देने की घोषणा की है और उनकी पहचान पूरी तरह से गुप्त रखने का भरोसा भी दिलाया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि खुलना, राजशाही और चटगांव समेत कई अन्य इलाकों से गैरकानूनी हथियारों को लेकर कुछ शुरुआती सुराग हाथ लगे हैं जिन पर तेजी से काम किया जा रहा है ताकि आगामी स्थानीय चुनावों से पहले शांति व्यवस्था कायम की जा सके।

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