Bangladesh में फैला खसरा का कहर, बच्चों की मौत का आंकड़ा पहुंचा एक हजार के करीब.

बांग्लादेश इन दिनों अपनी सबसे गंभीर और खतरनाक खसरा यानी Measles की बीमारी से जूझ रहा है, जिससे पूरे देश में हड़कंप मच गया है। स्वास्थ्य मंत्रालय और परिवार कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 5 सितंबर 2026 तक इस जानलेवा बीमारी से कम से कम 986 बच्चों की मौत हो चुकी है। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि अस्पतालों में बीमार बच्चों को संभालने के लिए जगह कम पड़ रही है और डॉक्टर लगातार दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। इस संकट ने आम लोगों की चिंता को बहुत ज्यादा बढ़ा दिया है और हर कोई अपने बच्चों की सेहत को लेकर डरा हुआ है।
कैसे फैला यह गंभीर संक्रमण और क्या हैं ताजा आंकड़े
यह खतरनाक प्रकोप पिछले साल यानी 2024 और 2025 के दौरान राजनीतिक उथल-पुथल और लेबर अनरेस्ट की वजह से बच्चों को समय पर टीके न लग पाने के कारण फैला है। जानकारों का कहना है कि जब बच्चों को रूटीन वैक्सीन समय पर नहीं मिली, तो यह बीमारी तेजी से फैल गई। इस बीमारी की शुरुआत 15 मार्च 2026 को हुई थी और तब से लेकर अब तक देश भर में संदिग्ध और पक्के मामलों की कुल संख्या 180,000 से ज्यादा हो गई है। हालात यह हैं कि हर दिन एक हजार से ज्यादा नए संदिग्ध मामले सामने आ रहे हैं, जिससे स्वास्थ्य विभाग की नींद उड़ी हुई है।
केवल एक दिन के आंकड़े देखें तो 4 सितंबर 2026 को सुबह 8:00 बजे तक पिछले 24 घंटों में एक और बच्चे की मौत दर्ज की गई, जबकि 1,114 नए संदिग्ध मामले और 40 लैब में कन्फर्म मामले सामने आए। इस तरह कुल संदिग्ध मामलों की संख्या बढ़कर 162,262 हो गई है और कन्फर्म मामलों का आंकड़ा 19,567 तक पहुंच गया है। ढाका का प्रसिद्ध Shishu Hospital और Infectious Diseases Hospital जैसे बड़े मेडिकल संस्थानों पर बहुत ज्यादा दबाव आ गया है। यहां गंभीर रूप से बीमार बच्चों का इलाज किया जा रहा है, जिनमें से ज्यादातर बच्चे कुपोषण यानी कुपोषित स्थिति से भी जूझ रहे हैं।
सरकार और अंतरराष्ट्रीय संगठनों द्वारा उठाए जा रहे कदम
इस भयानक स्थिति को काबू में करने के लिए प्रधानमंत्री Tarique Rahman की सरकार ने तुरंत बड़ा कदम उठाया। सरकार ने 5 अप्रैल 2026 को एक इमरजेंसी खसरा-रूबेला टीकाकरण अभियान शुरू किया, जिसमें 30 पहचाने गए हॉटस्पॉट इलाकों में 1.2 मिलियन यानी बारह लाख से ज्यादा बच्चों को टारगेट किया गया। इसके बाद 3 मई 2026 को पूरे देश में इस अभियान को बड़े पैमाने पर चलाया गया। प्रधानमंत्री के स्वास्थ्य मामलों के विशेष सहायक SM Ziauddin Hyder ने इस पूरी स्थिति को बेहद विनाशकारी बताया और कहा कि यह सब बच्चों के रूटीन टीके छूट जाने की वजह से हुआ है।
देश के गृह मंत्री Salahuddin Ahmed ने कसम खाई है कि इस आउटब्रेक को इस साल के अंदर ही पूरी तरह नियंत्रित कर लिया जाएगा। हालात की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने सभी मेडिकल स्टाफ की छुट्टियां रद्द कर दी हैं ताकि अस्पताल में डॉक्टरों और नर्सों की कोई कमी न हो। इसके अलावा विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO, UNICEF और Gavi, the Vaccine Alliance जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय संगठन भी स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ मिलकर इस आपदा से निपटने में पूरी मदद कर रहे हैं। इस बारे में अधिक जानकारी आप World Health Organization और ReliefWeb की आधिकारिक रिपोर्ट में देख सकते हैं।