बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप, बच्चों की मौत का आंकड़ा पहुंचा एक हजार के करीब, स्वास्थ्य व्यवस्था पर बढ़ा भारी दबाव.

Praggya Singh sabal5 September 20264 min read33 viewsWorld
बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप, बच्चों की मौत का आंकड़ा पहुंचा एक हजार के करीब, स्वास्थ्य व्यवस्था पर बढ़ा भारी दबाव.

पड़ोसी देश बांग्लादेश में इन दिनों खसरे की बीमारी ने विकराल रूप धारण कर लिया है, जिससे आम जनता और स्वास्थ्य विभाग दोनों की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। देश भर में इस खतरनाक बीमारी के कारण हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं और छोटे बच्चों की जान लगातार जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल 15 मार्च से अब तक खसरे और इसके जैसे लक्षणों के कारण कुल 987 लोगों की मौत हो चुकी है। इस गंभीर संकट को देखते हुए विशेषज्ञ इसे पिछले कुछ दशकों का सबसे बड़ा स्वास्थ्य खतरा मान रहे हैं, जिससे निपटने के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। सरकारी और स्वास्थ्य से जुड़े महकमों की तरफ से लगातार स्थिति पर नजर रखी जा रही है ताकि संक्रमण की रफ्तार को थामा जा सके।

अस्पतालों में उमड़ी भीड़ और लगातार सामने आ रहे नए मामले

बांग्लादेश की सरकारी समाचार एजेंसी बांग्लादेश संगबाद संस्था (बीएसएस) तथा ताइवान की राष्ट्रीय समाचार सेंट्रल न्यूज एजेंसी (सीएनए) ने स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) के हवाले से बताया है कि 15 मार्च से अब तक संदिग्ध खसरे से 888 बच्चों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा, जिन मामलों में खसरे की पुष्टि हुई है, उनमें मरने वालों की संख्या 99 तक पहुंच गई है। राहत की बात यह रही कि पिछले 24 घंटों के दौरान खसरे से किसी की मौत की सूचना नहीं मिली है, लेकिन नए मामलों का आना अभी भी जारी है। आंकड़ों के अनुसार, पिछले 24 घंटों में 1,114 संदिग्ध मामले सामने आए हैं, जो इस बीमारी के फैलने की रफ्तार को साफ तौर पर बयां करते हैं।

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सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 15 मार्च से लेकर अब तक कुल 1,62,262 संदिग्ध मामले दर्ज किए जा चुके हैं। इनमें से 19,567 मामलों में खसरे की पुष्टि हो चुकी है। पिछले 24 घंटों के दौरान ही 40 नए कन्फर्म मामले दर्ज किए गए हैं। इस पूरी अवधि के दौरान कुल 1,42,453 संदिग्ध मरीजों को इलाज के लिए अस्पतालों में भर्ती कराया गया था, जिनमें से 1,37,350 मरीज पूरी तरह से स्वस्थ होकर अपने घर वापस लौट चुके हैं। राजधानी ढाका के बच्चों के अस्पतालों में मरीजों की संख्या बहुत ज्यादा बढ़ जाने के कारण स्वास्थ्य व्यवस्था पर भारी दबाव आ गया है। अस्पतालों के खसरा वार्ड पूरी तरह भर चुके हैं और कई छोटे बच्चों को सांस लेने में बहुत ज्यादा तकलीफ होने के कारण ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखना पड़ रहा है।

छोटे बच्चों और कुपोषितों पर सबसे बड़ा खतरा

डॉक्टरों के अनुसार, इस बार का खसरा प्रकोप मुख्य तौर पर छह महीने से लेकर पांच साल तक की उम्र के बच्चों को अपना शिकार बना रहा है। अस्पताल में भर्ती छह महीने के एक बच्चे अयान का उदाहरण देते हुए डॉक्टरों ने बताया कि उसे पहले से निमोनिया था और बाद में वह खसरे की चपेट में आ गया। पहले से कमजोर फेफड़ों और शरीर में पोषण की कमी के कारण उसकी स्थिति बहुत ज्यादा गंभीर हो गई थी और उसे कई दिनों तक ऑक्सीजन पर रखना पड़ा। विशेषज्ञों का कहना है कि जिन बच्चों को सही समय पर पूरा पोषण नहीं मिलता, उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्युनिटी बहुत कमजोर होती है। ऐसे बच्चों के लिए खसरा जैसी संक्रामक बीमारी जानलेवा साबित हो सकती है, क्योंकि इसके साथ निमोनिया और मस्तिष्क में सूजन जैसी गंभीर जटिलताएं भी जुड़ जाती हैं।

टीकाकरण में देरी और लापरवाही बनी मुख्य वजह

खसरा एक बेहद संक्रामक वायरल बीमारी है, जो मुख्य तौर पर खांसने और छींकने से हवा के जरिए एक इंसान से दूसरे इंसान में फैलती है। जानकारों का मानना है कि इस बार संक्रमण के इस कदर बेकाबू होने के पीछे सबसे बड़ी वजह टीकाकरण अभियान में आई रुकावटें हैं। साल 2024 में प्रस्तावित टीकाकरण अभियान देश में चली राजनीतिक उथल-पुथल के कारण समय पर नहीं हो सका। इसके बाद साल 2025 के टीकाकरण अभियान पर भी लगातार हो रही हड़तालों और राजनीतिक अस्थिरता का बुरा असर पड़ा, जिसकी वजह से बच्चों को समय पर टीके की खुराक नहीं मिल पाई।

सरकार और विशेषज्ञों के कड़े कदम

इस भयानक स्थिति को देखते हुए सरकार अब हरकत में आ गई है और देश भर में बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान फिर से शुरू किया गया है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी ऐसे सभी बच्चों की पहचान कर रहे हैं जो किसी वजह से अपनी तय समय पर खसरे की खुराक नहीं पा सके थे। महामारी विशेषज्ञ और आईईडीसीआर (IEDCR) के पूर्व निदेशक महमूदुर रहमान ने जोर देकर कहा है कि इस बीमारी पर काबू पाने के लिए देशव्यापी टीकाकरण को बहुत तेज करना होगा। उन्होंने आम जनता से अपील की है कि वे पूरी सावधानी बरतें, संक्रमित बच्चों को बाकी लोगों से अलग रखें, बार-बार हाथ धोएं और बच्चों की देखभाल करने वाले लोग मास्क का इस्तेमाल जरूर करें। स्वास्थ्य मामलों में प्रधानमंत्री के विशेष सहायक एसएम जियाउद्दीन हैदर ने मौजूदा हालात को बेहद डरावना बताते हुए कहा है कि स्वास्थ्यकर्मी उन सभी बच्चों तक पहुंचने के लिए पूरी ताकत लगा रहे हैं जिन्हें समय पर टीका नहीं लग पाया था।

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