Bangladesh Plastic Waste Law: बांग्लादेश में प्लास्टिक कचरे से जुड़ा नया नियम लागू, बाल मजदूरी और प्रदूषण पर लगाम की तैयारी.

बांग्लादेश की राजधानी Dhaka में इन दिनों प्लास्टिक कचरे से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है। सड़कों और नालियों से प्लास्टिक की बोतलें बीनते हुए बच्चे आज भी अपनी रोजी-रोटी कमाने के लिए मजबूर हैं। यह दर्दनाक सच्चाई उस ग्लोबल रिसाइक्लिंग इंडस्ट्री का हिस्सा है जो काफी हद तक असंगठित मजदूरों पर टिकी हुई है। इस पूरी व्यवस्था को सुधारने और पर्यावरण को बचाने के लिए अब वहां की सरकार ने कड़े कदम उठाने का फैसला किया है।
नया प्लास्टिक नियम हुआ लागू
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय यानी MoEFCC ने पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1995 की धारा 13 के तहत 'Extended Producer Responsibility (EPR) Guidelines 2026 for Plastic Waste Management' को गजट में अधिसूचित कर दिया है। यह नियम 13 अगस्त 2026 से प्रभावी हो गया है। इसके बाद 12 सितंबर 2026 तक मीडिया रिपोर्ट्स और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने कॉर्पोरेट घरानों से आगे आने और इस गंभीर संकट पर जिम्मेदारी लेने की अपील की है। देश में हर साल लगभग 3.15 से 3.84 अरब सिंगल-यूज प्लास्टिक की बोतलें बनती हैं, जिसमें से केवल 21.4% प्लास्टिक ही रिसाइकिल हो पाता है।
नए नियमों के अनुसार अब निर्माताओं, आयातकों, ब्रांड मालिकों, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और खुदरा विक्रेताओं को इस्तेमाल के बाद के कचरे की औपचारिक जिम्मेदारी उठानी होगी। इससे सारा बोझ स्थानीय निकायों और असंगठित मजदूरों के सिर से कम होगा। इसके तहत कंपनियों को पहले दो वर्षों में अपने प्लास्टिक मार्केट वॉल्यूम का कम से कम 15% हिस्सा इकट्ठा करना होगा और 7.5% हिस्सा रिसाइकिल करना अनिवार्य किया गया है। इसके बाद तीसरे से पांचवें साल के बीच इस टारगेट को बढ़ाकर 30% कलेक्शन और 15% रिसाइक्लिंग कर दिया जाएगा। हालांकि निर्यात-उन्मुख यानी एक्सपोर्ट करने वाली फैक्ट्रियों को इस नियम से बाहर रखा गया है।
लाखों टन कचरे से जूझ रहा है देश
डिपार्टमेंट ऑफ एवीयरमेंट यानी DoE रजिस्ट्रेशन, निरीक्षण और ऑडिट के जरिए इन नियमों का पालन सुनिश्चित करेगा। मंत्रालय के संयुक्त सचिव Md Rezaul Karim ने इस बात की पुष्टि की है कि सरकार रिसाइकिल किए गए पीईटी के मानक तय करने के लिए बांग्लादेश स्टैंडर्ड्स एंड टेस्टिंग इंस्टीट्यूशन के साथ मिलकर काम करने की योजना बना रही है। यह पूरा बदलाव ऐसे समय में आया है जब पूरा देश भारी मात्रा में प्लास्टिक कचरे की समस्या से जूझ रहा है। आंकड़ों के मुताबिक पूरा देश हर साल लगभग 977,000 टन प्लास्टिक की खपत करता है।
साल 2020 तक ढाका में शहरी खपत प्रति व्यक्ति लगभग 24.0 किलोग्राम तक पहुंच गई थी। उसी साल इस शहर में हर दिन लगभग 646 टन प्लास्टिक कचरा पैदा हुआ था, जिसमें से 48% कचरा लैंडफिल में गया, 37% रिसाइकिल हुआ, 12% जलमार्गों में पहुंचा और 3% नालियों में फंस गया। अलजज़ीरा के पत्रकार Tanvir Chowdhury की रिपोर्ट के मुताबिक, जिस तरह से शहरी ठोस कचरे का उत्पादन साल 2040 तक प्रतिदिन 118,000 टन से अधिक होने की उम्मीद है, उसे देखते हुए सरकार इस ईपीआर ढांचे के जरिए असंगठित क्षेत्र को औपचारिक रूप देना चाहती है और सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा दे रही है।