Bangladesh का बड़ा बयान, भारत के साथ 101 समझौतों की समीक्षा का मकसद केवल आपसी हित देखना.

Sushma Kumari19 September 20263 min read30 viewsIndia
Bangladesh का बड़ा बयान, भारत के साथ 101 समझौतों की समीक्षा का मकसद केवल आपसी हित देखना.

बांग्लादेश ने भारत के साथ हुए पुराने समझौतों और एमओयू को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। बांग्लादेश के चीफ व्हिप नुरुल इस्लाम मोनी ने साफ किया है कि भारत के साथ पिछले समय में हुए 101 समझौतों की समीक्षा करने का मकसद किसी भी समझौते को रद्द करना बिल्कुल नहीं है। उनका कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य केवल दोनों देशों के बीच हुए करारों में यदि कोई कमी या विसंगति है, तो उसे दूर करना है ताकि यह साझेदारी दोनों देशों के लिए पूरी तरह फायदेमंद साबित हो सके।

पुराने समझौतों की होगी नए सिरे से जांच

नुरुल इस्लाम मोनी ने शुक्रवार देर रात एक फोन पर हुई बातचीत में बताया कि पिछली अवामी लीग सरकार के कार्यकाल के दौरान भारत के साथ कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए थे। अब बांग्लादेश सरकार के संबंधित मंत्रालय और विभाग इन सभी 101 एमओयू और समझौतों की बारीकी से जांच कर रहे हैं। सरकार यह देखना चाहती है कि क्या इनमें से कोई भी प्रावधान देश के हितों के खिलाफ तो नहीं है। यदि किसी भी प्रकार की कोई विसंगति सामने आती है, तो भारत सरकार के साथ बातचीत करके उसे सुलझाया जाएगा।

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उन्होंने पिछले हफ्ते भी यह बात कही थी कि सरकार इन सभी समझौतों की समीक्षा कर रही है और इस पूरी प्रक्रिया का परिणाम बहुत जल्द जनता के सामने लाया जाएगा। यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब बांग्लादेश राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए भारत के साथ द्विपक्षीय समझौतों की जांच कर रहा है। इन समझौतों में कनेक्टिविटी, बुनियादी ढांचा और अन्य सहयोग के क्षेत्र शामिल हैं।

भारत ने क्या कहा इस मामले पर

नई दिल्ली ने इस पूरे मामले पर मीडिया रिपोर्ट्स का संज्ञान जरूर लिया है, लेकिन भारतीय विदेश मंत्रालय का कहना है कि उन्हें ढाका की तरफ से इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने अपनी साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान स्पष्ट किया कि भारत अपने हितों की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा। भारत और बांग्लादेश के बीच कनेक्टिविटी एक बहुत बड़ा मुद्दा है, जिसमें बांग्लादेश के रास्ते पूर्वोत्तर राज्यों तक सामान ले जाने के लिए चटगांव और मोंगला बंदरगाहों का इस्तेमाल शामिल है।

इसके अलावा ऊर्जा सहयोग भी दोनों देशों के बीच संबंधों का एक अहम हिस्सा है। बांग्लादेश अपनी बिजली और ईंधन की जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है। विदेशी मुद्रा की कमी के कारण बांग्लादेश में कुछ बिजली खरीद समझौतों में भुगतान में देरी और वित्तीय स्तर पर दोबारा बातचीत की मांग भी देखी गई है। भारत ने भी रेलवे, सड़क और बंदरगाह परियोजनाओं के लिए कई लाइनों ऑफ क्रेडिट के जरिए 7 अरब डॉलर से अधिक की राशि दी है। कई भारतीय वित्त पोषित परियोजनाओं की योजना प्राधिकरणों द्वारा व्यवहार्यता समीक्षा की जा रही है, जिससे परियोजनाओं के काम पर असर पड़ सकता है।

सीमा सुरक्षा भी दोनों देशों के बीच आपसी सहयोग का एक मजबूत स्तंभ रही है। पिछली सरकार के दौरान बांग्लादेश ने भारत विरोधी चरमपंथी समूहों को अपनी जमीन का इस्तेमाल करने से रोकने में पूरा सहयोग किया था। इस समीक्षा प्रक्रिया को लेकर बांग्लादेशी पक्ष का यह भी कहना है कि इसका मतलब मौजूदा समझौतों को पूरी तरह से रद्द करना नहीं है, बल्कि केवल कमियों को दूर करना है।

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