बांग्लादेश में तोड़फोड़ और लूटपाट पर टीआईबी की चिंता, निष्पक्ष जांच की उठी मांग.

बांग्लादेश की राजधानी ढाका और आसपास के इलाकों में लगातार सामने आ रही तोड़फोड़ और लूटपाट की घटनाओं ने देश की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल बांग्लादेश यानी टीआईबी (TIB) ने इन घटनाओं को लेकर गहरी चिंता जताई है और सरकार से तुरंत सख्त कदम उठाने की मांग की है। संगठन का साफ कहना है कि इन मामलों को छोटी-मोटी घटनाएं मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि इसके पीछे की असल वजहों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सके।
स्वास्थ्य केंद्र और स्टूडियो पर हमला
हाल ही में मीरपुर स्थित रड्डा एमसीएच-एफपी स्वास्थ्य केंद्र में बड़े पैमाने पर लूटपाट और तोड़फोड़ की गई थी। इसके अलावा ईसीबी चत्तर इलाके में प्रसिद्ध कंटेंट क्रिएटर सलमान मुक्तादिर के स्टूडियो को भी निशाना बनाया गया और वहां भी भारी तोड़फोड़ की गई। टीआईबी ने अपने आधिकारिक बयान में इन दोनों ही घटनाओं की कड़ी निंदा की है। संगठन ने सरकार को चेताया है कि अगर जमीन पर अवैध कब्जा करने और लोगों से जबरन वसूली करने जैसी गतिविधियों पर लगाम नहीं लगाई गई, तो हालात और ज्यादा बिगड़ सकते हैं।
टीआईबी के कार्यकारी निदेशक इफ़्तेख़ारुज़्ज़मान ने मीडिया से बात करते हुए मीरपुर स्वास्थ्य केंद्र पर हुए हमले को सरकार और सत्ताधारी पार्टी के लिए बेहद शर्मनाक और चिंताजनक बताया। उन्होंने जानकारी दी कि यह स्वास्थ्य केंद्र पिछले करीब पांच दशकों से यानी 50 साल से इलाके के गरीब और जरूरतमंद परिवारों, खासकर महिलाओं और बच्चों को स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया करा रहा है। ऐसे जनहित संस्थान पर हमला होना समाज के लिए बहुत ही गलत संदेश देता है।
बीएनपी नेताओं और कार्यकर्ताओं की संलिप्तता के आरोप
इफ़्तेख़ारुज़्ज़मान ने पिछले साल यानी अगस्त 2024 के राजनीतिक घटनाक्रम के बाद से सामने आई स्थिति का जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस अवधि के बाद से सत्तारूढ़ बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के कुछ स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं के नाम जमीन हड़पने, जबरन वसूली करने और अलग-अलग क्षेत्रों में अपना दबदबा बनाने जैसे मामलों में सामने आए हैं। उन्होंने किशोरगंज की एक घटना का भी उदाहरण दिया, जहां एक जलाशय के मालिकाना हक को लेकर बीएनपी के ही दो स्थानीय गुट आपस में भिड़ गए थे और दोनों के बीच खूनी झड़प हुई थी।
संगठन ने मांग की है कि बीएनपी को अपनी पार्टी के भीतर सुधार लाने के लिए एक देशव्यापी अभियान चलाना चाहिए ताकि पार्टी से जुड़े लोग ऐसी अवैध गतिविधियों से दूर रहें। टीआईबी ने यह भी कहा कि कुछ मामलों में पार्टी स्तर पर लोगों को बाहर जरूर किया गया है, लेकिन कानून लागू करने वाली एजेंसियों की कार्रवाई अभी भी उतनी असरदार साबित नहीं हो रही है जितनी होनी चाहिए थी।
पुलिस प्रशासन की कार्रवाई और जांच
मीदपुर के रड्डा स्वास्थ्य केंद्र पर हुए हमले के मामले में अब स्थानीय पुलिस प्रशासन की भूमिका की भी जांच की जा रही है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने एक तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है। इस कमेटी को आगामी 3 अक्टूबर तक अपनी रिपोर्ट पुलिस अधिकारियों को सौंपनी है। पुलिस का कहना है कि इस घटना में शामिल होने के शक में कई लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और बाकी आरोपियों की तलाश में छापेमारी जारी है।
वहीं दूसरी ओर, ईसीबी चत्तर इलाके में कंटेंट क्रिएटर सलमान मुक्तादिर के स्टूडियो पर हुए हमले के मामले में भी पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि स्टूडियो पर हमला जमीन के कब्जे और उस पर नियंत्रण को लेकर उपजे विवाद की वजह से हुआ था। इस मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अब तक कुल पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
बंगाली दैनिक समाचार पत्र प्रोथोम आलो में छपी रिपोर्ट के अनुसार, टीआईबी ने सरकार से अपील की है कि वह बिना किसी देरी के देश में शांति और व्यवस्था बहाल करे। संस्था ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते अपराधियों के खिलाफ कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो देश में मनमानी करने, भ्रष्टाचार करने और कानून से बच निकलने की संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा, जिससे आम जनता का भरोसा न्याय व्यवस्था से उठ सकता है।