बांग्लादेश में रोहिंग्या संकट बना गंभीर राष्ट्रीय सुरक्षा खतरा, यूएनएचसीआर ने दी बड़ी चेतावनी

Praggya Singh sabal6 September 20262 min read26 viewsWorld
बांग्लादेश में रोहिंग्या संकट बना गंभीर राष्ट्रीय सुरक्षा खतरा, यूएनएचसीआर ने दी बड़ी चेतावनी

बांग्लादेश में रह रहे रोहिंग्या शरणार्थियों का मामला अब सिर्फ मानवीय सहायता तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि यह देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक बड़ा संकट बन गया है। 6 सितंबर 2026 को बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहउद्दीन अहमद ने ढाका में आयोजित एक गोलमेज बैठक के दौरान यह स्पष्ट किया कि देश में लगभग 15 लाख रोहिंग्या शरणार्थियों का लंबे समय तक रहना अब एक गंभीर राष्ट्रीय सुरक्षा खतरा बन चुका है। पिछले नौ वर्षों से लगातार जारी शरणार्थियों की इस आमद के कारण देश पर भारी दबाव पड़ रहा है। शिविरों के भीतर सुरक्षा को लेकर चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं, जिनमें नशीली दवाओं की तस्करी, सशस्त्र समूहों की गतिविधियां और महिलाओं के खिलाफ हिंसा जैसी घटनाएं शामिल हैं। इन समस्याओं के कारण शरणार्थी आबादी के साथ-साथ स्थानीय मेज़बान समुदाय की शांति भी खतरे में पड़ रही है।

शरणार्थियों के भरण-पोषण पर मंडराया वित्तीय संकट

इस बीच, बांग्लादेश में UNHCR के प्रतिनिधि इवो फ्रेइजसेन ने अल जज़ीरा को दिए एक साक्षात्कार में बताया कि हालांकि बांग्लादेश ने शरणार्थियों की मेजबानी करने में उदारता दिखाई है, लेकिन देश अनिश्चित काल तक इस संकट को अकेले नहीं झेल सकता है। फ्रेइजसेन ने 4 सितंबर 2026 को बांग्लादेश के विदेश मामलों के सलाहकार को अपने प्रमाण पत्र सौंपे थे। उन्होंने चेतावनी दी कि लगभग 95 प्रतिशत रोहिंग्या पूरी तरह से मानवीय सहायता पर निर्भर हैं और उनके बीच अब उम्मीद लगातार कम होती जा रही है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस समस्या का स्थायी समाधान केवल म्यांमार में सुरक्षित, स्वैच्छिक और टिकाऊ वापसी ही है, जो नागरिकता, आवाजाही की स्वतंत्रता और भेदभाव की समाप्ति जैसे बुनियादी मुद्दों के समाधान पर निर्भर करती है। हालांकि, यूएनएचसीआर का यह भी कहना है कि म्यांमार में मौजूदा हालात ऐसे नहीं हैं जो शरणार्थियों की वापसी का समर्थन कर सकें।

समुद्री मार्गों से पलायन और फंडिंग की भारी कमी

इस स्थिति को और अधिक जटिल बना रही है मानवीय सहायता के लिए मिलने वाली धनराशि में आई भारी गिरावट। वर्ष 2026 के लिए 710.5 मिलियन डॉलर की अपील पिछले वर्ष की तुलना में 26 प्रतिशत कम है। 30 जून 2026 तक, यूएनएचसीआर ने म्यांमार आपातकालीन स्थिति के लिए अपनी 328.5 मिलियन डॉलर की आवश्यकता के मुकाबले 63 प्रतिशत फंडिंग की कमी दर्ज की थी। इसके अलावा, शरणार्थियों का जीवन लगातार खतरे में बना हुआ है। वर्ष 2025 को समुद्र के रास्ते पलायन करने वाले शरणार्थियों के लिए सबसे घातक वर्ष के रूप में दर्ज किया गया था, जहां बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर में लगभग 900 लोगों की मौत हो गई थी या वे लापता हो गए थे। गृह मंत्री सलाहउद्दीन अहमद ने शरणार्थियों की सम्मानजनक वापसी सुनिश्चित करने और वैश्विक संघर्षों को बांग्लादेश के इस मानवीय व सुरक्षा संकट पर हावी होने से रोकने के लिए तत्काल और तेज अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक सहयोग की अपील की है।

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