पूर्व पीएम बेनेट ने नेतन्याहू को चुनौती दी कि वे कतर को दुश्मन देश घोषित करें
पूर्व पीएम नाफ्ताली बेनेट ने बेंजामिन नेतन्याहू पर आरोप लगाया कि वे राजनीतिक फायदे के लिए कतर का मुद्दा उठा रहे हैं।

यरूशलेम (इजरायल): इजरायल के पूर्व प्रधानमंत्री नाफ्ताली बेनेट ने मौजूदा प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर तीखा हमला बोला है। बेनेट ने नेतन्याहू को चुनौती दी है कि वे कतर को एक दुश्मन देश घोषित करें और अपने कार्यालय से उन लोगों को हटा दें जिनका संबंध कतर से बताया जा रहा है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में बेनेट ने आरोप लगाया कि नेतन्याहू चुनाव में विदेशी हस्तक्षेप की जांच के बीच राजनीतिक उथल-पुथल मचाने के लिए कतर के मुद्दे का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे लंबे समय से नेतन्याहू से कतर को दुश्मन राज्य घोषित करने की मांग कर रहे थे, लेकिन नेतन्याहू ने बार-बार इनकार किया और उसे बचाने की कोशिश की।
बेनेट ने यह भी आरोप लगाया कि नेतन्याहू के कार्यालय में अभी भी ऐसे सलाहकार हैं, जिनके बारे में यह साबित हो चुका है कि उन्होंने युद्ध और नरसंहार के दौरान कतर से लाखों डॉलर लिए। उनके मुताबिक, इन सलाहकारों ने प्रधानमंत्री कार्यालय में रहकर कतर के हितों को बढ़ावा दिया है।
चुनाव प्रक्रिया में अनुचित हस्तक्षेप के संदेह पर बेनेट ने शिन बेट प्रमुख डेविड ज़िनी और केंद्रीय चुनाव समिति के अध्यक्ष जज सोलबर्ग पर भरोसा जताया है। उन्होंने मांग की है कि इस मामले की जांच जल्द और पूरी तरह से की जाए। बेनेट का कहना है कि नेतन्याहू केवल अपने राजनीतिक फायदे के लिए कतर को याद कर रहे हैं, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जनता का विश्वास कम होने का खतरा है।
यह विवाद तब शुरू हुआ जब केंद्रीय चुनाव समिति के अध्यक्ष जस्टिस नोआम सोलबर्ग ने शिन बेट प्रमुख को विदेशी फंडिंग के जरिए चुनाव प्रभावित करने के संदेह की जांच करने का निर्देश दिया। एजेंसी को एक हफ्ते के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी है।
दूसरी तरफ, बेंजामिन नेतन्याहू ने इस विवाद को एक भूकंप की तरह बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि विदेशी संस्थाओं ने अरब पार्टियों के पक्ष में चुनावों में हस्तक्षेप किया है। उन्होंने जायोनिस्ट पार्टियों से अपील की है कि वे राआम और जॉइंट लिस्ट के साथ सहयोग करने से इनकार करें।
इन आरोपों को अरब राजनीतिक नेताओं ने खारिज कर दिया है। यूनाइटेड अरब लिस्ट (राआम) के अध्यक्ष मंसूर अब्बास ने कहा कि उनकी पार्टी का इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है और वे जांच में पूरा सहयोग करेंगे। वहीं, बलाद के अध्यक्ष सामी अबू शहदा ने आरोप लगाया कि नेतन्याहू और उनके सहयोगी अरब पार्टियों के प्रति नफरत फैलाने और चुनाव परिणामों को चुनौती देने के लिए इन आरोपों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
विपक्ष के नेता गाडी आइजनकोट ने भी इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि बिना पुष्टि वाले संदेहों का इस्तेमाल चुनाव परिणामों को कमजोर करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।