अमेरिकी सीनेटर बर्निए सैंडर्स ने ईरान युद्ध खत्म करने और इजराइल की फंडिंग रोकने की मांग की

अमेरिकी सीनेटर बर्निए सैंडर्स ने ईरान के खिलाफ युद्ध को अवैध बताते हुए इजराइल की सैन्य फंडिंग रोकने और संघर्ष समाप्त करने की वकालत की है।

Gautam Sahu5 November 20262 min read0 viewsWorld
अमेरिकी सीनेटर बर्निए सैंडर्स ने ईरान युद्ध खत्म करने और इजराइल की फंडिंग रोकने की मांग की

वॉशिंगटन: अमेरिकी सीनेटर बर्निए सैंडर्स ने ईरान के खिलाफ चल रहे युद्ध को समाप्त करने और इजराइल को दी जाने वाली अमेरिकी फंडिंग रोकने की मांग की है। 3 नवंबर 2026 के मध्यावधि चुनावों के बाद, जहां अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट दोनों में डेमोक्रेटिक पार्टी को बहुमत मिला है, सैंडर्स ने इसे अपनी प्राथमिक विधायी प्राथमिकताओं में रखा है।

सैंडर्स ने 28 फरवरी 2026 से शुरू हुए ईरान के साथ सैन्य संघर्ष को "अवैध" और "असंवैधानिक" करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, "हम उस युद्ध को रोकने जा रहे हैं।"

सीनेटर ने जोर देकर कहा कि अब डेमोक्रेटिक पार्टी के पास कांग्रेस में बहुमत है, जिससे उनके पास इस संघर्ष की फंडिंग रोककर इसे समाप्त करने का विधायी अधिकार है। उन्होंने बताया कि यह कदम केवल प्रतीकात्मक प्रस्तावों तक सीमित नहीं रहेगा।

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वर्तमान में "ऑपरेशन एपिक फ्युरी" के तहत अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरानी सैन्य बुनियादी ढांचे और नेतृत्व पर हवाई हमले किए जा रहे हैं। इस संघर्ष के कारण Strait of Hormuz में शिपिंग लेन में भारी व्यवधान आया है और हालात अब भी तनावपूर्ण बने हुए हैं।

हालांकि डेमोक्रेटिक पार्टी ने कांग्रेस पर नियंत्रण पा लिया है, लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अभी भी व्हाइट हाउस में हैं और उनके पास वीटो पावर है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि राष्ट्रपति के संभावित वीटो को पलटने के लिए दो-तिहाई सुपरमेजॉरिटी की जरूरत होगी, जो डेमोक्रेटिक एजेंडे के सामने एक बड़ी चुनौती है।

विदेश नीति के अलावा, डेमोक्रेटिक नेतृत्व ने "अफोर्डेबिलिटी" एजेंडे पर ध्यान केंद्रित करने और ट्रंप प्रशासन की नीतियों को चुनौती देने के लिए अपनी निगरानी शक्तियों का उपयोग करने का संकेत दिया है।

दूसरी ओर, ईरानी अधिकारियों ने अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के नतीजों को अपनी प्रतिरोध रणनीति का परिणाम बताया है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि विधायी नियंत्रण में बदलाव के बावजूद उन्हें अमेरिका की ईरान नीति में किसी बुनियादी बदलाव की उम्मीद नहीं है।

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