Bhavans Middle East के संस्थापक एन.के. रामचंद्रन मेनन का निधन

शिक्षा जगत से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। खाड़ी देशों में भारतीय शिक्षा की मजबूत नींव रखने वाले Bhavans Middle East स्कूल नेटवर्क के संस्थापक और चेयरमैन एन.के. रामचंद्रन मेनन (N. K. Ramachandran Menon) अब हमारे बीच नहीं रहे। 78 वर्ष की आयु में केरल में उनका निधन हो गया, जिससे शिक्षा और प्रवासी समुदाय में शोक की लहर दौड़ गई है।
केरल में हुआ अंतिम संस्कार
प्राप्त जानकारी के अनुसार, उनका निधन बुधवार को केरल में हुआ। इसके बाद गुरुवार को उनके पैतृक निवास अलुवा (Aluva) में उनका अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके परिवार के सदस्यों के अलावा कई गणमान्य लोग शामिल हुए। उनके निधन की खबर मिलते ही यूएई, कुवैत और बहरीन सहित विभिन्न खाड़ी देशों में स्थित उनके शिक्षण संस्थानों में शोकसभाएं आयोजित की गईं और सम्मानस्वरूप स्कूलों को गुरुवार को जल्दी बंद कर दिया गया।
कुवैत के एक बैंकर से शिक्षा जगत के दिग्गज तक का सफर
एन.के. रामचंद्रन मेनन की यह सफलता किसी प्रेरणा से कम नहीं है। वह साल 1969 में एक बैंकर के रूप में कुवैत गए थे। समय के साथ उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में कदम रखा और भारतीय विद्या भवन नेटवर्क को मध्य पूर्व (Middle East) तक विस्तारित करने का बीड़ा उठाया। उनकी मेहनत रंग लाई और साल 2006 में कुवैत में 'इंडियन एजुकेशनल स्कूल' (IES) के रूप में इस ग्रुप का पहला कैंपस खुला।
उनके कुशल नेतृत्व और विजन का ही नतीजा था कि आने वाले वर्षों में यह शिक्षा साम्राज्य तेजी से बढ़ता गया। उनके मार्गदर्शन में इस नेटवर्क का विस्तार यूएई, बहरीन और कुवैत के अन्य हिस्सों तक हुआ, जिसके तहत कई नामी स्कूल और अर्ली-इयर सेंटर्स की शुरुआत की गई। शिक्षा के क्षेत्र में उनके इस अभूतपूर्व योगदान के लिए साल 2022 की शुरुआत में उन्हें यूएई का प्रतिष्ठित 'गोल्डन वीजा' भी प्रदान किया गया था। वह यह उपलब्धि हासिल करने वाले कुवैत में बसे पहले भारतीय थे।
परिवार और संस्थान संभाल रहे हैं विरासत
एन.के. रामचंद्रन मेनन अपने पीछे भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं, जिसमें उनकी पत्नी सुधा रामचंद्रन और दो बच्चे शामिल हैं। उनकी बेटी दिव्या राजेश रामचंद्रन 'Bhavans Middle East' की डायरेक्टर के रूप में जिम्मेदारी संभाल रही हैं, जबकि उनके बेटे सूरज रामचंद्रन वाईस चेयरमैन का पद संभाल रहे हैं।
उनके निधन पर इंडियन बिजनेस एंड प्रोफेशनल काउंसिल सहित कई प्रमुख संगठनों और संस्थानों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। विभिन्न स्कूलों के प्रधानाचार्यों और स्टाफ सदस्यों ने उन्हें याद करते हुए कहा कि उनका जाना शिक्षा जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है, लेकिन उनके द्वारा बोए गए ज्ञान के बीज हमेशा आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन करते रहेंगे।