भोटेकोशी बाढ़ का कहर, नेपाल में 1,433 से ज्यादा लोग हुए संपर्कविहीन, खोजबीन जारी.

नेपाल में भोटेकोशी नदी में आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है जिसके बाद से हालात बेहद चिंताजनक बने हुए हैं। इस कुदरती आफत के कारण देश भर में कुल 1,433 नेपाली और विदेशी नागरिक संपर्कविहीन हो गए हैं। आम जनता और प्रशासनिक अमले के बीच इस बात को लेकर भारी चिंता बनी हुई है कि अचानक आए इस सैलाब के बाद लोगों का क्या हाल हुआ होगा। प्रभावित इलाकों में सुरक्षा एजेंसियां लगातार लापता लोगों की तलाश में जुटी हुई हैं ताकि किसी तरह सही सलामत जानकारी जुटाई जा सके।
राष्ट्रीय प्राधिकरण ने जारी किए आंकड़े
राष्ट्रीय विपद् जोखिम न्यूनीकरण तथा प्रबंधन प्राधिकरण की तरफ से दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह आंकड़े गुरुवार दोपहर ढाई बजे तक के हैं। प्राधिकरण के अधिकारियों ने बताया कि इस सूची से अभी रसुवा और नुवाकोट जिलों के आंकड़ों को अलग रखा गया है क्योंकि वहां की स्थिति का आकलन और संकलन अलग तरीके से किया जा रहा है। इन दोनों जिलों को छोड़कर बाकी देश के सभी सातों प्रांतों से लापता लोगों की सूचियां मंगाई गई हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि इस आपदा की चपेट में आने वालों में केवल स्थानीय नागरिक ही नहीं बल्कि बड़ी संख्या में विदेशी मेहमान और सैलानी भी शामिल हैं।
किन-किन प्रांतों में कितना है असर
प्राधिकरण के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, रसुवा और नुवाकोट को छोड़कर देश के सातों प्रदेशों से कुल 916 नेपाली नागरिक और 517 विदेशी नागरिक लापता बताए जा रहे हैं। अगर प्रांतों के हिसाब से बात करें तो कोशी प्रदेश में कुल 80 लोग संपर्कविहीन हैं। इन लापता लोगों में अलग-अलग जलविद्युत कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारी, स्थानीय कारोबारी और व्यापारी शामिल हैं जो कोशी प्रदेश के 11 अलग-अलग जिलों से ताल्लुक रखते हैं। इसके अलावा मधेश प्रदेश में 37 लोग लापता हैं।
वहीं दूसरी तरफ, रसुवा और नुवाकोट को छोड़कर बागमती प्रदेश में यह आंकड़ा सबसे ज्यादा 420 तक पहुंच गया है। गंडक प्रदेश में 84 लोग अभी भी अपनों से दूर और संपर्क से बाहर हैं। इसके अलावा लुंबिनी प्रदेश में 105, कर्णाली प्रदेश में 118 और सुदूर पश्चिम प्रदेश में 72 लोगों के संपर्कविहीन होने की बात सामने आई है। स्थानीय प्रशासन और राहत दल लगातार प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन रास्तों के खराब होने की वजह से बचाव कार्यों में कुछ रुकावटें भी आ रही हैं।