बिहार में इंसानियत शर्मसार, ढाई लाख रुपये में दो महीने के मासूम को बेचने की थी तैयारी.

Nura Basta30 August 20262 min read13 viewsIndia
बिहार में इंसानियत शर्मसार, ढाई लाख रुपये में दो महीने के मासूम को बेचने की थी तैयारी.

बिहार के किशनगंज जिले से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है जहाँ इंडो-नेपाल सीमा के पास गलगलिया थाना क्षेत्र में सीमा सुरक्षा बल यानी एसएसबी ने मानव तस्करी की आशंका के चलते एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। इस कार्रवाई के दौरान सुरक्षा बलों ने एक महिला को धर दबोचा जो अपने दो महीने के मासूम बच्चे को किसी अन्य व्यक्ति को सौंपने की फिराक में थी। शुरुआती जांच और पूछताछ में यह बात सामने आई है कि इस बच्चे को राजस्थान के रहने वाले एक व्यक्ति को ढाई लाख रुपये में बेचने की पूरी योजना बनाई गई थी, लेकिन समय रहते सुरक्षा बलों ने इस अवैध सौदे को नाकाम कर दिया।

गुप्त सूचना के आधार पर हुई कार्रवाई

प्राप्त जानकारी के अनुसार 41वीं वाहिनी एसएसबी रानीडांगा को पहले ही इस बात की गुप्त सूचना मिल चुकी थी कि एक महिला एक छोटे बच्चे को लेकर गलगलिया-भातगांव बस स्टैंड के पास पहुंचने वाली है। सूचना में यह भी बताया गया था कि वह वहां किसी अनजान व्यक्ति से मिलकर उस मासूम शिशु को उसे सौंपने वाली है। इस पुख्ता खबर के मिलते ही एसएसबी की ए कंपनी निम्बूगुड़ी और जी कंपनी भातगांव की संयुक्त टीमों ने तुरंत हरकत में आते हुए बस स्टैंड के आसपास पूरी मुस्तैदी के साथ घेराबंदी कर ली। इस ऑपरेशन में एसएसबी की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग टीम और स्थानीय राहत संस्था किशनगंज ने भी पूरी मदद की, जिसके परिणामस्वरूप महिला को बच्चे के साथ सुरक्षित पकड़ लिया गया। पकड़ी गई महिला मूल रूप से हाथखोला और बागडोगरा की रहने वाली बताई जा रही है.

बाल कल्याण समिति के हवाले किया गया बच्चा

एसएसबी के रिकॉर्ड के अनुसार बरामद किए गए इस मासूम बच्चे का जन्म इसी साल 19 जून 2026 को हुआ था। जब पुलिस और सुरक्षा अधिकारियों ने महिला से कड़ाई से पूछताछ की तो उसने स्वीकार किया कि वह इस बच्चे को राजस्थान के एक व्यक्ति को ढाई लाख रुपये में देने जा रही थी। इस मामले की अधिक जानकारी देते हुए गलगलिया थानाध्यक्ष राकेश कुमार ने बताया कि शुरुआती जांच-पड़ताल में यह बात भी सामने आई है कि वह बच्चा असल में उस महिला का अपना ही है और उसने इसे गोद देने की बात कही है। फिलहाल कानून के मुताबिक उस महिला और मासूम बच्चे को बाल कल्याण समिति यानी सीडब्ल्यूसी के समक्ष पेश कर दिया गया है। अब सीडब्ल्यूसी के आगामी निर्देशों के अनुसार ही इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस और बाल कल्याण विभाग की टीमें मिलकर इस बात की गहराई से छानबीन कर रही हैं कि आखिर किन परिस्थितियों में बच्चे को गोद देने की बात आई और उस महिला को बस स्टैंड तक लाने के पीछे असली मकसद क्या था। सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा बल लगातार मानव तस्करी जैसी अवैध गतिविधियों के खिलाफ अभियान चला रहे हैं ताकि किसी भी बच्चे की सुरक्षा खतरे में न पड़े.

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