बीएलए कमांडर-इन-चीफ बशीर ज़ेब बलोच ने दिया इस्तीफा, सारी ताकत काउंसिल के हाथ में
बलोच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने नेतृत्व परिवर्तन की घोषणा की है। बशीर ज़ेब बलोच के बाद अब सीनियर कमांड काउंसिल कमान संभालेगी।

बलोचिस्तान (पाकिस्तान): बलोच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने अपने संगठन में बड़े नेतृत्व परिवर्तन की घोषणा की है। संगठन के कमांडर-इन-चीफ बशीर ज़ेब बलोच ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। अब सभी प्रशासनिक, सैन्य और नीति निर्धारण शक्तियां सीनियर कमांड काउंसिल को ट्रांसफर कर दी गई हैं।
द बलोचिस्तान पोस्ट (TBP) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह फैसला 16 अक्टूबर को संगठन के सर्वोच्च निकायों की एक संयुक्त बैठक में लिया गया। बीएलए प्रवक्ता जीयंद बलोच के बयान का हवाला देते हुए बताया गया कि कमांडरों ने अपनी गतिविधियों को नई गति देने के लिए सर्वसम्मति से इस बदलाव को मंजूरी दी है। सीनियर कमांड काउंसिल, जिसे संगठन की सर्वोच्च गवर्निंग बॉडी बताया गया है, अब इस बदलाव की प्रक्रिया की निगरानी करेगी।
संगठन ने स्पष्ट किया है कि चयन प्रक्रिया के बाकी चरण पूरे होने के बाद जल्द ही नए कमांडर-इन-चीफ की घोषणा की जाएगी, हालांकि इसके लिए कोई निश्चित समय सीमा नहीं बताई गई है। नुशकी के रहने वाले और बलोच स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन-आजाद (BSO-Azad) के पूर्व अध्यक्ष बशीर ज़ेब बलोच ने दिसंबर 2018 में एक आत्मघाती हमले में मारे गए असलम बलोच का स्थान लिया था।
बीएलए ने कहा कि यह बदलाव 2018 में असलम बलोच द्वारा संगठन के पुनर्गठन के दौरान स्थापित सिद्धांतों पर आधारित है। संगठन का दावा है कि इससे वंशवादी राजनीति और आजीवन नेतृत्व का अंत हुआ है। बयान में कहा गया कि इस आंदोलन में कोई भी कमांडर चाहे कितना भी प्रभावशाली या उच्च पदस्थ क्यों न हो, वह जीवन भर के लिए कमांडर-इन-चीफ नहीं रह सकता।
प्रवक्ता के अनुसार, कमान बदलने के लिए संगठन के संविधान में एक औपचारिक नेतृत्व हस्तांतरण प्रक्रिया को शामिल किया गया है। इसे एक शांतिपूर्ण और संवैधानिक बदलाव बताया गया है, जिसमें किसी भी तरह का आंतरिक विखंडन या टकराव नहीं हुआ है। संगठन का तर्क है कि बलोच सशस्त्र संगठनों में यह अपनी तरह का पहला नेतृत्व परिवर्तन है, क्योंकि पहले उत्तराधिकार तंत्र न होने की वजह से आंतरिक मतभेद पैदा होते थे।
बयान में आगे कहा गया कि इतिहास गवाह है कि केवल वही आंदोलन स्थायी सफलता पाते हैं जो व्यक्तिगत हस्तियों के बजाय संवैधानिक संस्थानों के माध्यम से काम करते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इस फैसले को सभी ऑपरेशनल फ्रंट्स, क्षेत्रीय और कैंप कमांडरों सहित विशेष इकाइयों का पूर्ण और बिना शर्त समर्थन मिला है।
जीयंद बलोच ने यह स्पष्ट किया कि नेतृत्व में इस बदलाव से संगठन की सैन्य रणनीति, फील्ड ऑपरेशंस या चेन ऑफ कमांड पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी बलों के खिलाफ उनके हमले जारी रहेंगे और सभी मोर्चों पर ऑपरेशन बिना किसी रुकावट के चलते रहेंगे।