खाड़ी में तेल उत्पादन तेज़ी से लौटा तो ब्रेंट क्रूड 2027 में 60 डॉलर के दशक तक गिर सकता है

नई दिल्ली: कच्चे तेल की कीमतों को लेकर एक बड़ी उम्मीद जगी है। निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, अगर फारस की खाड़ी में तेल उत्पादन उम्मीद से जल्दी पटरी पर लौट आया, तो ब्रेंट क्रूड की कीमत 2027 तक प्रति बैरल 60 डॉलर के दशक तक आ सकती है। लेकिन बैंक ने साथ ही चेताया है कि इलाके में तनाव और बढ़ा तो दाम काफी ऊपर भी जा सकते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, 2027 में खाड़ी का औसत तेल उत्पादन फरवरी 2026 के स्तर से लगभग 10 लाख बैरल प्रतिदिन ज़्यादा हो जाए, तो ब्रेंट के दाम 60 डॉलर के आसपास पहुँच सकते हैं। गोल्डमैन का कहना है कि मध्य पूर्व में आपूर्ति का तेज़ी से बढ़ना, या फिर भू-राजनीतिक जोखिम के कारण लगे अतिरिक्त दाम (रिस्क प्रीमियम) का जल्दी घटना, कीमतों में गिरावट के सबसे संभावित कारण होंगे।
बैंक की मुख्य उम्मीद यही है कि मध्य पूर्व में आपूर्ति में चल रहे बदलाव आखिरकार कच्चे तेल के दाम नीचे लाएँगे। फिर भी इलाके में दोबारा टकराव भड़कना सबसे बड़ा जोखिम बना हुआ है। गोल्डमैन ने दिसंबर 2026 के लिए ब्रेंट का अनुमान बढ़ाकर 90 डॉलर प्रति बैरल कर दिया है, जबकि पहले यह 85 डॉलर था। 2027 के औसत भाव का अनुमान 80 डॉलर पर ही रखा गया है।
आपूर्ति सुधरी, फिर भी दाम ऊँचे क्यों?
रिपोर्ट बताती है कि खाड़ी से तेल निर्यात, अनुमानित अनरिपोर्टेड निर्यात को मिलाकर, हाल में 2025 के औसत स्तर तक लौट आया है। सितंबर में वैश्विक तेल बाज़ार लगभग संतुलित रहा। इसके बावजूद कीमतें ऊँची बनी हुई हैं, क्योंकि दुनिया भर में तेल का भंडार कम है और आपूर्ति बाधित होने की आशंका बनी हुई है। इसी डर से खरीदार भौतिक तेल ख़रीदकर भंडार भर रहे हैं और वायदा बाज़ार में सुरक्षा कवच भी ले रहे हैं।
गोल्डमैन ने OECD की वाणिज्यिक भंडारण सीमा से बाहर के वैश्विक तेल भंडार को भी अपने मॉडल में जोड़ा है। इससे सितंबर के लिए ब्रेंट का उचित मूल्य 6 डॉलर बढ़कर 80 डॉलर प्रति बैरल आंका गया है। बैंक के मुताबिक ये भंडार अब तेल कीमतों का आकलन करने के लिए उपयोगी संकेतक बन गए हैं।
बैंक ने यह भी कहा कि कीमतों के गिरने की गुंजाइश के बावजूद जोखिम ऊपर की ओर झुके हुए हैं, खासकर नज़दीकी अवधि में। अगर 2027 में खाड़ी का उत्पादन फरवरी 2026 के स्तर से लगभग 5 करोड़ बैरल प्रतिदिन नीचे रहा, तो ब्रेंट का औसत भाव 125 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है। तेल ढांचे को नुकसान, जहाज़ों पर बढ़ते हमले और लंबे समय तक बना रहने वाला जोखिम प्रीमियम, ये तीन ऐसे कारण हैं जो दामों को ऊपर धकेल सकते हैं।
कुल मिलाकर तस्वीर साफ़ है। 2027 में कच्चे तेल की दिशा त