मिडिल ईस्ट में सप्लाई रुकने के डर से कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर 110 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचीं

Gautam Sahu21 October 20262 min read0 viewsWorld
मिडिल ईस्ट में सप्लाई रुकने के डर से कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर 110 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचीं

लंदन: मिडिल ईस्ट में तेल की सप्लाई बाधित होने की आशंकाओं के बीच कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा उछाल आया है। 21 अक्टूबर 2026 को ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 110 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गए, जो पिछले पांच महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है।

कीमतों में इस तेजी की मुख्य वजह लाल सागर और ओमान की खाड़ी में शिपिंग को लेकर बढ़ता जोखिम है। साथ ही सऊदी अरब के तेल बुनियादी ढांचे पर संभावित खतरों ने बाजार में डर पैदा कर दिया है। शिप-ट्रैकिंग फर्म केप्लर के मुताबिक, पिछले दो हफ्तों में होर्मुज जलडमरूमध्य के पास कम से कम 18 जहाजों पर हमले हुए हैं। एलएसईजी के विश्लेषकों ने बताया कि ये घटनाएं अब ओमान की खाड़ी तक फैल गई हैं।

ईरानी राज्य मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने मंगलवार को जानकारी दी कि होर्मुज जलडमरूमध्य के दक्षिण में एक सुपरटैंकर समुद्री माइन की चपेट में आ गया।

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राजनयिक तनाव ने बाजार की अनिश्चितता को और बढ़ा दिया है। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बागर गलीबाफ ने बुधवार को कहा कि जब तक होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी खास शर्तें पूरी नहीं होतीं, तब तक तेहरान वाशिंगटन पर भरोसा नहीं करेगा। वहीं, ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसिन रजाई ने साफ किया कि देश से समृद्ध परमाणु सामग्री नहीं हटाई जाएगी।

डीबीएस के ऊर्जा अनुसंधान प्रमुख सुव्रो सरकार ने इस तेजी के पीछे मुनाफावसूली और अमेरिका व ईरान के बीच जल्द समाधान की उम्मीदें खत्म होने को वजह बताया है।

सप्लाई की चिंता तब और बढ़ गई जब अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट (API) के आंकड़ों में अमेरिकी स्टॉक में बड़ी गिरावट देखी गई। 20 अक्टूबर के डेटा के मुताबिक, कच्चे तेल का भंडार 49 लाख बैरल, गैसोलीन करीब 20 लाख बैरल और डिस्टिलेट्स लगभग 26 लाख बैरल कम हुए हैं। अमेरिकी ऊर्जा विभाग ने मंगलवार को पुष्टि की कि वह डीजल की कमी को दूर करने के लिए वैश्विक रिफाइनरों के साथ तालमेल बिठा रहा है।

दूसरी ओर, ओपेक प्लस सदस्य देशों ने अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने से इनकार कर दिया है। सऊदी अरब, रूस, इराक, कुवैत, कजाकिस्तान, अल्जीरिया और ओमान ने 4 अक्टूबर की बैठक में फैसला किया था कि नवंबर 2026 तक उत्पादन के मौजूदा स्तर को ही बरकरार रखा जाएगा।

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