पश्चिम एशिया में तनाव और सप्लाई की चिंता से ब्रेंट क्रूड तेल की कीमत 115 डॉलर के करीब

पश्चिम एशिया में तनाव और सप्लाई की चिंता के बीच ब्रेंट क्रूड तेल 115 डॉलर के करीब पहुंचा। सऊदी अरब में सुरक्षा जोखिम बढ़े।

Kush Singh26 October 20262 min read0 viewsFinance
पश्चिम एशिया में तनाव और सप्लाई की चिंता से ब्रेंट क्रूड तेल की कीमत 115 डॉलर के करीब

लंदन: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और तेल की सप्लाई को लेकर बनी चिंताओं के बीच ब्रेंट क्रूड तेल की कीमतें 115 डॉलर प्रति बैरल के करीब बनी हुई हैं। सोमवार 26 अक्टूबर 2026 को तेल बाजार में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया।

तेहरान में कतरी मध्यस्थों द्वारा अमेरिका के समन्वय से तनाव कम करने की कोशिशों के बाद कीमतों में मामूली गिरावट आई और यह 115.23 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। हालांकि, पिछले एक हफ्ते में तेल की कीमतों में 5 प्रतिशत से ज्यादा का उछाल आया है, जिससे यह अपने 52 हफ्ते के उच्चतम स्तर 117.41 डॉलर के करीब पहुंच गया था।

सऊदी अरब के रियाद एयरपोर्ट और ईस्ट-वेस्ट क्रूड ऑयल पाइपलाइन के पंपिंग स्टेशनों पर हूती बलों द्वारा हमले के दावों के बाद सुरक्षा चिंताएं और बढ़ गई हैं। इन जोखिमों को देखते हुए अमेरिकी विदेश विभाग ने गैर-आपातकालीन सरकारी कर्मियों और उनके परिवारों को सऊदी अरब छोड़ने का आदेश दिया है।

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार 25 अक्टूबर को कहा कि वह तेहरान के साथ समझौते या किसी निर्णायक सैन्य कार्रवाई के फैसले के करीब हैं। दूसरी ओर, सऊदी अरामको ने सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए 2027 की दूसरी छमाही से सिंगापुर के जुरोंग रॉक कैवर्न्स में कच्चा तेल स्टोर करने की योजना बनाई है।

सिंगापुर इंटरनेशनल एनर्जी वीक में आईईए के कार्यकारी निदेशक फातिह बिरोल ने चेतावनी दी कि ईरान से जुड़े संघर्ष के कारण 2027 में वैश्विक ऊर्जा बाजार के युद्ध से पहले वाली स्थिति में लौटने की संभावना कम है। इससे सप्लाई बाधित हो रही है और कीमतें बढ़ रही हैं।

एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर ने बताया कि डब्लूटीआई क्रूड फिलहाल 101 और 102 डॉलर प्रति बैरल के बीच घूम रहा है, जबकि ब्रेंट 115 डॉलर से ऊपर बना हुआ है। फिलिप नोवा की प्रियंका सचदेवा के मुताबिक, होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी सप्लाई की चुनौतियां एक बड़ा कारण हैं और मौजूदा गिरावट केवल पोजीशन एडजस्टमेंट है।

इन चुनौतियों के बीच सऊदी अरब, रूस, इराक, कुवैत, कजाकिस्तान, अल्जीरिया और ओमान समेत ओपेक प्लस देश 2027 के लिए उत्पादन के नए बेसलाइन तय करने पर काम कर रहे हैं।

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