Brent Crude Price: मध्य पूर्व के तनाव से कच्चे तेल के दाम में भारी उछाल, ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर के पार पहुंचा.

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बुधवार, 9 सितंबर 2026 को जबरदस्त तेजी देखने को मिली। मध्य पूर्व के देशों में चल रहे गंभीर तनाव और फौजी टकराव के कारण ग्लोबल ऑयल मार्केट में हड़कंप मच गया है, जिससे Brent crude के दाम जुलाई महीने के बाद पहली बार $100 प्रति बैरल के आंकड़े को पार कर गए। सरकारी समाचार एजेंसी WAM की रिपोर्ट के मुताबिक, नजदीki डिलीवरी वाले ब्रेंट क्रूड में $3.29 यानी 3.4% की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिसके बाद यह $101.21 प्रति बैरल पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान इसकी कीमत अधिकतम $101.58 तक पहुंच गई थी। इसके साथ ही, अमेरिका के वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी WTI के नवंबर फ्यूचर्स में भी $3.02 यानी 3.25% की तेजी आई और यह $96.05 प्रति बैरल पर बंद हुआ। इस पूरी स्थिति की विस्तृत जानकारी आप WAM News पर देख सकते हैं।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल की मुख्य वजह
ऑयल मार्केट में आई इस बड़ी तेजी के पीछे कई मुख्य कारण हैं, जो क्षेत्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को सीधे तौर पर प्रभावित कर रहे हैं। अमेरिका की तरफ से ईरानी क्रूड ले जाने वाले पांच टैंकरों पर सैन्य हमले किए गए थे, जिसके बाद से तनाव बहुत ज्यादा बढ़ गया है। यह कार्रवाई एक अमेरिकी युद्धपोत पर हुए असफल हमले के जवाब में की गई थी। इसके अलावा, ईरान ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के आसपास नए प्रतिबंध क्षेत्र घोषित कर दिए हैं, जिससे यह बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग अधिकांश टैंकरों की आवाजाही के लिए पूरी तरह से बंद हो चुका है। इस संकट को और हवा तब मिली जब ईरान समर्थित हौथी विद्रोहियों ने सऊदी अरब के जिजान स्थित अरामको रिफाइनरी पर हमला कर दिया। इन सभी लगातार हो रही घटनाओं की वजह से वैश्विक स्तर पर तेल का स्टॉक कम होता जा रहा है।
वैश्विक बाजार और तेल भंडार पर असर
जब से यह फौजी झड़पें और तनाव शुरू हुए हैं, तब से दुनिया भर में तेल का कुल भंडार 400 million barrels से ज्यादा घट चुका है। अमेरिका का स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व यानी SPR भी पिछले साल की तुलना में 29.2% गिरकर अब केवल 286.6 million barrels पर आ गया है। इस गिरावट और सप्लाई चेन में आ रही रुकावटों ने आम जनता और इंडस्ट्री से जुड़े लोगों की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिका में स्टॉक से जुड़े आंकड़ों की पुष्टि WAM Stocks Report के जरिए की गई है। खाड़ी देशों से तेल का आयात प्रभावित होने की वजह से आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतें आम आदमी के बजट को बिगाड़ सकती हैं, जिससे खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और भारत आने-जाने वाले लोगों पर भी महंगाई का सीधा असर पड़ सकता है।
डेटा टेबल: कच्चे तेल की कीमतों का हाल
| Oil Benchmark | Price Change | Percentage Change | Settlement Price |
|---|---|---|---|
| Brent Crude | +$3.29 | 3.4% | $101.21 |
| WTI Crude | +$3.02 | 3.25% | $96.05 |
विशेषज्ञों की राय और आगे की स्थिति
ऊर्जा बाजार के जानकारों का कहना है कि आने वाले दिनों में भी तेल की कीमतें अस्थिर रह सकती हैं। आईसीआईएस में एनर्जी एंड रिफाइनिंग के डायरेक्टर अजय परमार ने बताया कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज का बंद होना ही इन कीमतों में अचानक आई तेजी का सबसे बड़ा कारण है। वहीं, इंटरेक्टिव इन्वेस्टर के हेड ऑफ मार्केट्स रिचर्ड हंटर का मानना है कि भू-राजनीतिक हालात अभी भी काफी गंभीर बने हुए हैं और फिलहाल दोनों पक्षों के बीच नरमी या समझौते के कोई साफ संकेत नजर नहीं आ रहे हैं। हालांकि गोल्डमैन सैक्स का मानना है कि फारस की खाड़ी से होने वाले निर्यात में धीरे-धीरे सुधार हो सकता है, लेकिन अगर मौजूदा रुकावटें और तनाव ऐसे ही जारी रहे, तो ब्रेंट क्रूड की कीमतें $120 प्रति बैरल के आंकड़े को भी पार कर सकती हैं।