अमेरिका और ईरान की जंग से क्रूड ऑयल हुआ महंगा, ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर के पार पहुँचा.

दुनियाभर में तनाव और जंग के माहौल के बीच आम आदमी की जेब पर बड़ा असर पड़ना शुरू हो गया है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण 9 सितंबर 2026 को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल यानी ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के आंकड़े को पार कर गया। यह 24 जुलाई के बाद क्रूड ऑयल की सबसे ऊंची कीमत है। इस बढ़ोतरी से वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की सप्लाई बाधित होने का खतरा पैदा हो गया है, जिसका सीधा असर भारत समेत पूरी दुनिया के बाजारों और आम जनता पर पड़ रहा है।
कच्चे तेल की कीमतों में अचानक उछाल
शुरुआती कारोबार में ब्रेंट क्रूड बढ़कर 100.29 डॉलर प्रति बैरल पर पहुँच गया, जबकि मंगलवार को इसकाSettlement 97.89 डॉलर पर हुआ था। इसके अलावा, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी WTI क्रूड की कीमत भी चढ़कर लगभग 95.03 डॉलर प्रति बैरल हो गई। पिछले 24 घंटों के दौरान हालात काफी तनावपूर्ण रहे हैं। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स यानी IRGC ने जॉर्डन में एक अमेरिकी सैन्य बेस पर मिसाइल से हमला करने की घोषणा की। जॉर्डन की सेना ने पुष्टि की कि उन्होंने 20 में से 18 बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही रोक लिया और इस घटना में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।
खाड़ी देशों में जहाजों और तेल tankers पर हमले
तनाव यहीं नहीं रुका, बल्कि IRGC ने फारस की खाड़ी में दो अमेरिकी जहाजों, आठ तेल टैंकरों पर हमले करने और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में 10 अन्य जहाजों के साथ झड़प होने का दावा भी किया। इसके अलावा, इराक के अल-फव के पास एक बहुत बड़े क्रूड ऑयल कैरियर यानी VLCC में आग लगने की रिपोर्ट भी सामने आई है। इन हमलों के जवाब में 8 सितंबर को अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM ने ईरान के पांच तेल टैंकरों को नष्ट कर दिया। इनमें फारस की खाड़ी में एम/टी कविज़, एम/टी चारमीनार, एम/टी होराइजन 1, एम/टी रियेस्को और खार्ग द्वीप के पास एम/टी डर्या शामिल थे।
अमेरिका और ईरान के बीच जुबानी जंग तेज
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस जवाबी कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि यदि कोई उनके दो जहाजों पर गोली चलाएगा, तो वे इसके बदले उनके तीन जहाज नष्ट करके और भी बड़ा आर्थिक बोझ डालेंगे। वहीं दूसरी ओर, ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबफ ने आगे के तनाव को लेकर चेतावनी दी और कहा कि अमेरिकियों को यह समझ लेना चाहिए कि आनुपातिक प्रतिक्रियाओं का दौर अब समाप्त हो चुका है। इससे पहले सऊदी अरब की तेल सुविधाओं पर ईरानी समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा किए गए हमलों ने इस संघर्ष को और अधिक गंभीर बना दिया है। जून के महीने में पाकिस्तान और Qatar द्वारा की गई कूटनीति मध्यस्थता पहल भी दोनों पक्षों द्वारा नियमों का पालन न करने के आरोपों के बीच विफल हो गई थी।
बाजार विशेषज्ञों और आम जनता पर असर
पिछले छह महीनों से चल रहे इस संघर्ष को लेकर बाजार के विशेषज्ञों ने गहरी चिंता व्यक्त की है। अर्थशास्त्री हमाद हुसैन ने बताया कि बाजार अब लंबे समय तक सप्लाई बाधित रहने की आशंकाओं को ध्यान में रखकर कीमतें तय कर रहा है। वहीं विश्लेषक पैट्रिक मुनेली ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य की नाजुक स्थिति पर प्रकाश डाला। बैंक ऑफ इंग्लैंड के गवर्नर एंड्रयू बेली ने 8 सितंबर को चेतावनी दी थी कि बढ़ती ऊर्जा लागत के कारण महंगाई का दबाव और ब्याज दरों का जोखिम लगातार बढ़ रहा है, जिससे आम आदमी का जीवन प्रभावित हो रहा है।