BRICS Payment Task Force: UPI और रूस के बीच पेमेंट लिंक पर तेजी से काम

Lov Singh2 October 20262 min read0 viewsEnglish
BRICS Payment Task Force: UPI और रूस के बीच पेमेंट लिंक पर तेजी से काम

आज के समय में जब पूरी दुनिया डिजिटल भुगतान की तरफ तेजी से बढ़ रही है, तब देशों के बीच पैसों का लेनदेन आसान बनाने के लिए नए कदम उठाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में, BRICS Payment Task Force ने पेमेंट इंटरऑपरेबिलिटी और स्थानीय मुद्राओं (local-currency settlements) में लेनदेन को आगे बढ़ाने की दिशा में काम जारी रखने का फैसला किया है। ब्रिक्स इंटरनेशनल फोरम के चेयरमैन डॉ. पवन जोश ने इस बात पर जोर दिया है कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य सीमा पार लेनदेन (cross-border transactions) को आसान बनाना है, न कि किसी मौजूदा वैश्विक वित्तीय प्रणाली को बदलना।

UPI और रूस की पेमेंट प्रणाली को जोड़ने की तैयारी

भारत के यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) और रूस की फास्टर पेमेंट्स सिस्टम (FPS) को आपस में जोड़ने की पहल इस दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इस योजना के तहत पहले चरण में कंज्यूमर-टू-बिजनेस (C2B) भुगतान पर फोकस किया जाएगा। इससे भविष्य में भारत का कोई भी नागरिक रूस यात्रा के दौरान आसानी से UPI के जरिए भुगतान कर सकेगा और ठीक इसी तरह रूस के नागरिक भी भारत में FPS के माध्यम से खरीदारी कर सकेंगे।

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व्यापारियों और छात्रों के लिए आसान होंगे लेनदेन

विशेषज्ञों के अनुसार, इस व्यवस्था के लागू होने से न सिर्फ पर्यटकों को फायदा होगा, बल्कि छात्रों और विदेशों में रहने वाले अपने परिवारों को पैसे भेजने वाले लोगों को भी बड़ी राहत मिलेगी। कैश और जटिल क्रॉस-border चैनलों पर निर्भरता कम होगी। इसके अलावा, निर्यातकों के लिए बिजनेस-टू-बिजनेस (B2B) लेयर पर भी काम चल रहा है, साथ ही डिजिटल रुपया और डिजिटल रूबल जैसी सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDCs) पर भी चर्चा जारी है।

SWIFT को चुनौती देने की बात से इनकार

कुछ हलकों में ऐसी चर्चाएं थीं कि BRICS Pay जैसी व्यवस्थाएं वैश्विक वित्तीय प्रणाली SWIFT को चुनौती देने के लिए हैं, लेकिन इन सभी अटकलों को खारिज कर दिया गया है। डॉ. पवन जोश ने साफ किया कि इसका मकसद डी-डॉलराइजेशन नहीं है और SWIFT अपनी जगह वैश्विक वित्तीय रीढ़ बना रहेगा। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य केवल वित्तीय संप्रभुता को मजबूत करना और नागरिकों के लिए यात्रा, शिक्षा तथा रेमिटेंस को आसान बनाना है। योजना के अनुसार, इन सभी बदलावों को वर्ष 2030 के आसपास चरणबद्ध तरीके से लागू किए जाने की उम्मीद है।

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