ब्रिक्स सम्मेलन में दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति की मांग, एआई पर बने अंतरराष्ट्रीय निगरानी तंत्र.

Praggya Singh sabal14 September 20263 min read33 viewsIndia
ब्रिक्स सम्मेलन में दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति की मांग, एआई पर बने अंतरराष्ट्रीय निगरानी तंत्र.

दुनियाभर में तेजी से आगे बढ़ रही टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को लेकर अब गंभीर चिंताएं सामने आने लगी हैं। दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिलिर रामफोसा ने ब्रिक्स देशों के मंच से एक बड़ा और अहम आह्वान किया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि एआई की तकनीक इंसानों की उसे समझने और काबू करने की ताकत से आगे नहीं निकलनी चाहिए। नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान उन्होंने एआई के स्वतंत्र वैज्ञानिक मूल्यांकन और निगरानी के लिए एक सख्त अंतरराष्ट्रीय तंत्र स्थापित करने की जोरदार मांग उठाई है, ताकि इसके गलत इस्तेमाल को समय रहते रोका जा सके।

एआई के फायदे और बढ़ते खतरे

तुर्किए की सरकारी समाचार एजेंसी अनाडोलू और स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राष्ट्रपति रामफोसा ने माना कि अगर एआई का इस्तेमाल जिम्मेदारी और सही तरीके से किया जाए, तो यह दुनिया से असमानता, गरीबी और अविकास जैसी समस्याओं को कम करने में काफी मददगार साबित हो सकता है। यह तकनीक चिकित्सा, शिक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान और कृषि उत्पादन के क्षेत्र में एक बहुत बड़ा सकारात्मक बदलाव ला सकती है। हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने अत्यधिक शक्तिशाली होते एआई सिस्टम से जुड़े संभावित खतरों को लेकर भी आगाह किया। उन्होंने बताया कि उन्नत साइबर ऑपरेशन, जैविक हथियारों के विकास में मदद, स्वायत्त कार्रवाई, लोगों की हेरफेर, बड़े पैमाने पर निगरानी और आम लोगों के रोजगार पर इसका बुरा असर पड़ सकता है। उनका कहना था कि हमें न तो एआई से डरने की जरूरत है और न ही इसे बिना सोचे-समझे अपनाने की, बल्कि हमारी मुख्य जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना है कि इंसानी शासन एआई की रफ्तार से आगे चले।

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स्वतंत्र ऑडिट और सरकारी निगरानी की वकालत

दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति ने एआई कंपनियों की स्वतंत्र बाहरी निगरानी की जरूरत पर जोर दिया और एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेई के विचारों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि इन कंपनियों को औपचारिक बाहरी जांच, स्वतंत्र ऑडिट और सख्त सरकारी निगरानी के दायरे में लाया जाना चाहिए। विमानन, फार्मास्यूटिकल्स, परमाणु ऊर्जा और वित्तीय क्षेत्रों का उदाहरण देते हुए उन्होंने समझाया कि जिन उद्योगों का सीधा असर आम इंसान की सुरक्षा और कल्याण पर पड़ता है, वहां नियम और कानून पहले से ही सामान्य व्यवस्था का हिस्सा हैं। इसलिए एआई के क्षेत्र में भी ऐसा ही कड़ा नियंत्रण होना बेहद जरूरी है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग और सुरक्षा उपाय

राष्ट्रपति रामफोसा ने प्रस्ताव दिया कि सभी ब्रिक्स देशों को मिलकर एआई के स्वतंत्र वैज्ञानिक मूल्यांकन के लिए एक साझा अंतरराष्ट्रीय तंत्र तैयार करना चाहिए। इस व्यवस्था के तहत मानव नियंत्रण के स्पष्ट नियम होने चाहिए और किसी भी गंभीर एआई घटना की जानकारी देना अनिवार्य होना चाहिए। इसके अलावा, उन्होंने विकासशील देशों में संप्रभु एआई क्षमताओं को मजबूत करने के लिए अधिक निवेश करने की बात कही ताकि सुरक्षा उपायों को भी समय के साथ और ज्यादा मजबूत किया जा सके। इस दौरान उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के उस प्रस्ताव का भी स्वागत किया जिसमें ब्रिक्स के लिए एक अलग एआई इकोसिस्टम स्थापित करने की बात कही गई थी, और यह स्पष्ट किया कि दक्षिण अफ्रीका इस दिशा में हरसंभव सहयोग देने के लिए पूरी तरह तैयार है।

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