BRICS Summit: भारत की पहल पर अबू धाबी के क्राउन प्रिंस और ईरान के राष्ट्रपति की हुई खास मुलाकात

Praggya Singh sabal12 September 20262 min read21 viewsUAE
BRICS Summit: भारत की पहल पर अबू धाबी के क्राउन प्रिंस और ईरान के राष्ट्रपति की हुई खास मुलाकात

नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS Summit के दौरान कूटनीति के मोर्चे पर एक बड़ी और अहम घटना देखने को मिली। भारत की मध्यस्थता और महत्वपूर्ण भूमिका के चलते पश्चिम एशिया के तनाव के बीच ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस Sheikh Khaled bin Mohamed bin Zayed Al Nahyan आपस में मिले। ANI News की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बैठक ने दोनों देशों के बीच बातचीत के नए रास्ते खोले हैं और भारत ने एक सच्चे शांतिप्रद की भूमिका निभाई है। दोनों नेता इस बड़े वैश्विक सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए 11 सितंबर 2026 को भारत पहुंचे थे और यह ऐतिहासिक मुलाकात 12 सितंबर 2026 को हुई।

ब्रिक्स मंच से ईरान के राष्ट्रपति का कड़ा संदेश

सम्मेलन को संबोधित करते हुए ईरान के राष्ट्रपति ने दुनिया के सामने अपनी बात रखी। उन्होंने सभी देशों से एकजुट होकर एकतरफा और अमानवीय प्रतिबंधों का मुकाबला करने की अपील की। उन्होंने कहा कि इस वैश्विक मंच को हमेशा न्याय की आवाज बनना चाहिए। इसके अलावा, उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि नागरिक बुनियादी ढांचे और शांतिपूर्ण परमाणु सुविधाओं पर होने वाले हमलों को रोकने के लिए सभी सदस्यों को मिलकर आवाज उठानी चाहिए। उनके अनुसार, इस तरह के हमले सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा पैदा करते हैं। साथ ही, उन्होंने फलस्तीनी लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार को वैश्विक शासन व्यवस्था के लिए एक बहुत बड़ी परीक्षा बताया। इस मंच पर हुई चर्चाओं ने यह साबित किया कि आपसी सहयोग के बिना क्षेत्रीय शांति हासिल करनामुश्किल है।

नई दिल्ली घोषणा पत्र 2026 और शांति की अपील

यह पूरा सम्मेलन New Delhi Declaration 2026 को सर्वसम्मति से अपनाने के साथ समाप्त हुआ। इस घोषणा पत्र में पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ रहे संघर्ष और तनाव पर गहरी चिंता जताई गई है। दस्तावेज में सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने की अपील की गई है। साथ ही, संयुक्त राष्ट्र चार्टर के नियमों का पालन करते हुए आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और क्षेत्र में लंबे समय तक शांति बनाए रखने के लिए केवल बातचीत का रास्ता अपनाने पर जोर दिया गया। इस महत्वपूर्ण दस्तावेज में यह भी साफ किया गया कि वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं और आम लोगों के इस्तेमाल वाले बुनियादी ढांचे को चल रहे संघर्ष के प्रभावों से बचाना बहुत जरूरी है। इस पूरी खबर के बारे में अधिक जानकारी आप ANI News की रिपोर्ट में पढ़ सकते हैं।

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