बलोच स्टूडेंट एक्शन कमेटी ने राजनीतिक नेताओं पर लगाया आंदोलन कमजोर करने का आरोप और छात्र लोकतंत्र की सुरक्षा की मांग की

बलोचिस्तान (पाकिस्तान): बलोच स्टूडेंट एक्शन कमेटी (BSAC) ने बलोच राष्ट्रवादी नेताओं के तौर-तरीकों पर गहरी चिंता जताई है। कमेटी ने आरोप लगाया है कि राजनीतिक नेतृत्व का एक हिस्सा आंदोलन को कमजोर कर रहा है और मुश्किलों का सामना कर रहे छात्रों को जरूरी समर्थन नहीं दे रहा है।
X पर एक पोस्ट के जरिए BSAC ने अब्दुल बलोच, जिन्हें बंजारा कमेश भी कहा जाता है, की राजनीतिक गतिविधियों का जिक्र किया। कमेटी ने कहा कि बलोचिस्तान में लोकतांत्रिक संस्थाओं की हालत यह बताती है कि यहां का राजनीतिक नेतृत्व सच्चाई और न्याय के सिद्धांतों से दूर जा रहा है।
पोस्ट के मुताबिक, बलोच राजनीतिक नेता ज्यादातर सत्ता के संघर्ष और राजनीतिक गतिविधियों में उलझे हुए हैं। इसकी वजह से राष्ट्रवादी राजनीतिक संगठनों और पार्टियों के लिए अपना संगठनात्मक काम चलाने और आंतरिक चर्चा करने में गंभीर चुनौतियां पैदा हो गई हैं।
कमेटी ने यह भी आरोप लगाया कि राजनीतिक दलों की वजह से बलोच लोगों की मानसिक शांति और सुरक्षा प्रभावित हो रही है। BSAC का कहना है कि जो लोग वास्तव में राजनीतिक उद्देश्यों को आगे बढ़ाना चाहते हैं, उन्हें राष्ट्रवादी समूहों से पर्याप्त समर्थन नहीं मिल रहा है, जबकि छात्र अभाव और कठिनाइयों में जी रहे हैं।
BSAC ने आंदोलन में राष्ट्रवादी नेताओं की भूमिका को नुकसानदेह बताया है। कमेटी के अनुसार, कुछ नेता सक्रिय रूप से आंदोलन के उद्देश्यों को कमजोर कर रहे हैं, तो कुछ छात्रों से जुड़ी समस्याओं पर चुप्पी साधे हुए हैं।
कमेटी ने जोर देकर कहा कि राजनीतिक नेताओं की मामूली निष्क्रियता या उनके गलत फैसले भी व्यापक राष्ट्रीय उद्देश्य को नुकसान पहुंचा सकते हैं। उन्होंने मांग की है कि बलोच लोगों, खासकर मुश्किलों का सामना कर रहे छात्रों की आकांक्षाओं और चिंताओं पर अधिक ध्यान दिया जाए।
BSAC ने कहा कि राजनीतिक और राष्ट्रीय प्रयासों में छात्र लोकतंत्र को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, न कि ऐसी गतिविधियां होनी चाहिए जिससे अशांति फैले या छात्र आंदोलन को और नुकसान पहुंचे।