बलोच शहीदों के दिन से पहले BSO आजाद का दो हफ्ते का राष्ट्रव्यापी अभियान

बलोच स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन आजाद ने 13 नवंबर को बलोच शहीदों के दिन से पहले दो हफ्ते का सोशल मीडिया अभियान चलाने का ऐलान किया है।

Gautam Sahu30 October 20262 min read0 viewsWorld
बलोच शहीदों के दिन से पहले BSO आजाद का दो हफ्ते का राष्ट्रव्यापी अभियान

बलोचिस्तान (पाकिस्तान): बलोच स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन आजाद (BSO Azad) ने 13 नवंबर को मनाए जाने वाले 'बलोच शहीदों के दिन' (Baloch Martyrs Day) से पहले दो हफ्ते का राष्ट्रव्यापी सोशल मीडिया अभियान चलाने का फैसला किया है। संगठन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी दी है। इस अभियान का मकसद बलोच राष्ट्रीय मुक्ति आंदोलन में जान गंवाने वाले सदस्यों को श्रद्धांजलि देना है।

BSO आजाद ने शहीदों को राष्ट्रीय संघर्ष की असली संपत्ति बताया है। संगठन के मुताबिक, उनकी प्रतिबद्धता और बलिदान उस आंदोलन को प्रेरित और निर्देशित करते रहते हैं, जिसे संगठन ने 'कब्जे' के खिलाफ लड़ाई करार दिया है। पोस्ट में कहा गया है कि इन शहीदों ने बलोचिस्तान की आजादी के लिए अपनी निजी आकांक्षाओं, स्वतंत्रता, सुख-सुविधाओं और जीवन का त्याग कर दिया, जिससे वे बलोच राष्ट्र की सामूहिक स्मृति में अमर हो गए हैं।

संगठन ने बताया कि 13 नवंबर का दिन उन सरमचरों, राजनीतिक कार्यकर्ताओं और नागरिकों के सम्मान और याद में समर्पित है, जिन्होंने इस संघर्ष के दौरान अपनी जान गंवाई। इस अवसर पर संगठन का मीडिया विभाग दो हफ्ते तक सोशल मीडिया पर शहीदों का विवरण, उनकी जीवनियां, लेख, व्यक्तिगत अनुभव, विजुअल्स और दस्तावेजी रिपोर्ट साझा करेगा।

इस अभियान के तहत बलोचिस्तान के साथ-साथ दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में यादगारी कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। BSO आजाद ने बलोच समूहों, सोशल मीडिया कार्यकर्ताओं, पत्रकारों, राजनीतिक कार्यकर्ताओं और बलोच समुदाय के सदस्यों से इस अभियान में शामिल होने और श्रद्धांजलि सत्र आयोजित करने की अपील की है।

बलोचिस्तान पिछले कई दशकों से राजनीतिक अशांति, अलगाववादी विद्रोह और सुरक्षा अभियानों का सामना कर रहा है। लापता लोगों के परिवारों ने अपने रिश्तेदारों की जानकारी और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किए हैं। मानवाधिकार समर्थकों ने लापता व्यक्तियों के मामलों को लेकर पाकिस्तानी अधिकारियों की आलोचना की है, जबकि राज्य ने प्रांत में सुरक्षा चुनौतियों और उग्रवाद का हवाला दिया है।

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