बलोचिस्तान में पाकिस्तान की युवा सशक्तिकरण योजनाओं पर BSO आजाद ने उठाए सवाल और इसे राजनीतिक नैरेटिव बदलने की कोशिश बताया

Gautam Sahu20 October 20262 min read0 viewsWorld
बलोचिस्तान में पाकिस्तान की युवा सशक्तिकरण योजनाओं पर BSO आजाद ने उठाए सवाल और इसे राजनीतिक नैरेटिव बदलने की कोशिश बताया

क्वेटा (बलोचिस्तान): बलोच स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन आजाद (BSO Azad) ने बलोचिस्तान में पाकिस्तान सरकार द्वारा चलाए जा रहे युवा सशक्तिकरण अभियानों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। संगठन का आरोप है कि रोजगार योजनाओं, कौशल विकास कार्यक्रमों, खेल गतिविधियों और शिक्षा के अवसरों का इस्तेमाल युवाओं की राजनीतिक चेतना को कमजोर करने और एक खास राजनीतिक नैरेटिव बनाने के लिए किया जा रहा है।

BSO आजाद के विश्लेषण के मुताबिक, जो सरकारें लंबे समय से राजनीतिक संघर्षों में उलझी होती हैं, वे अक्सर सुरक्षा अभियानों के साथ विकास कार्यों को जोड़ देती हैं। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि जनता की सोच को प्रभावित किया जा सके और सरकारी नीतियों के प्रति उनकी सहमति हासिल की जा सके।

संगठन ने कहा कि बलोचिस्तान में युवाओं के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रमों को केवल सामाजिक-आर्थिक विकास और रोजगार सृजन के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, इन कार्यक्रमों का एक बड़ा राजनीतिक मकसद युवाओं को मौजूदा व्यवस्था में शामिल करना है, ताकि उनकी सामूहिक राजनीतिक शिकायतों को पीछे धकेला जा सके।

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विश्लेषण में बलोचिस्तान युवा नीति (Balochistan Youth Policy) के दस्तावेज का जिक्र करते हुए कहा गया कि राज्य के राजनीतिक उद्देश्यों और युवा विकास के बीच गहरा संबंध है। संगठन का तर्क है कि प्रांत में युवाओं की भागीदारी को पाकिस्तानी राज्य और बलोच आबादी के बीच चल रहे पुराने राजनीतिक संघर्ष से अलग नहीं किया जा सकता।

BSO आजाद ने यह आरोप भी लगाया कि राजनीतिक शिकायतों को केवल बेरोजगारी, कौशल की कमी और सीमित आर्थिक अवसरों की समस्या बताकर पेश किया जा रहा है। संगठन के अनुसार, इस तरह के नजरिए से जन असंतोष के असली कारणों को नजरअंदाज करने का जोखिम रहता है और इससे युवा व्यापक राजनीतिक मांगों के बजाय केवल व्यक्तिगत आर्थिक तरक्की की ओर बढ़ेंगे।

संगठन ने जबरन गायब किए जाने, न्यायेतर हत्याओं, मनमानी गिरफ्तारियों और शांतिपूर्ण राजनीतिक वकालत पर लगी पाबंदियों के आरोपों का हवाला दिया। BSO आजाद ने तर्क दिया कि ये तमाम मुद्दे राज्य के उन दावों के विपरीत हैं जिनमें युवाओं को सशक्त बनाने की बात कही जाती है।

विश्लेषण में कहा गया कि सबसे बड़ा विरोधाभास बलोच युवाओं को आर्थिक और सामाजिक भागीदार बनाने के दावों और उनकी राजनीतिक एजेंसी को प्रतिबंधित करने के बीच है। संगठन का मानना है कि रोजगार, शिक्षा और उद्यमिता कार्यक्रम उन शिकायतों को खत्म नहीं कर सकते जो राजनीतिक संघर्ष और मौलिक अधिकारों के सवालों से जुड़ी हैं।

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