UNHRC में उठा बलूचिस्तान के मानवाधिकारों का मुद्दा, बलूच याकजेथी कमेटी ने किया स्वागत

जिनेवा में चल रहे संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के सत्र के दौरान बलूचिस्तान के हालात और बलूच नेताओं की हिरासत का मामला उठाए जाने पर बलूच याकजेथी कमेटी (BYC) ने खुशी जताई है। संगठन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए इस कदम का स्वागत किया है और इसे एक जरूरी विकास बताया है।
मानवाधिकार संगठनों की अपील
ग्लोबल ह्यूमन राइट्स डिफेंस (GHRD) ने बलूचिस्तान में BYC के नेताओं और कार्यकर्ताओं की स्थिति पर गंभीर चिंता जताई थी और UNHRC से इस मामले में तुरंत संज्ञान लेने की मांग की थी। BYC ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों, संयुक्त राष्ट्र और अन्य संबंधित अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से लगातार अपील की है कि वे बलूचिस्तान के मानवाधिकारों की स्थिति पर अपनी नजर बनाए रखें। संगठन ने यह भी मांग की है कि सभी घटनाओं की स्वतंत्र जांच कराई जाए और प्रभावित परिवारों की आवाज़ को अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाया जाए ताकि उन्हें न्याय मिल सके।
इमरान अली की मौत का मामला
इससे पहले बलूच याकजेथी कमेटी ने 20 साल के बलूच छात्र इमरान अली की कथित जबरन गुमशुदगी और उसके बाद हुई मौत पर भी गहरी चिंता व्यक्त की थी। संगठन ने इस मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग की थी। दस्तावेजों के मुताबिक, केच के जुमरान के रहने वाले और असलम के बेटे इमरान अली को 27 अगस्त 2025 को क्वेटा से कथित तौर पर उठाया गया था। इमरान अपनी पढ़ाई के लिए क्वेटा गए थे और ए-वन सिटी में एक किराए के कमरे में रह रहे थे, जहां काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट (CTD) के जवानों ने उन्हें कथित तौर पर हिरासत में लिया था।
परिवार का कहना था कि गुमशुदगी के बाद उन्होंने इमरान की रिहाई के लिए गुहार लगाई थी और यह भी कहा था कि अगर उन्होंने कोई गलती की है तो उन्हें अदालत में पेश किया जाए और निष्पक्ष सुनवाई का मौका दिया जाए। हालांकि, कमेटी के मुताबिक लगभग एक साल तक उनका कोई अता-पता नहीं चला और बाद में उनकी मौत की खबर सामने आई, जिससे लोगों में काफी रोष है और बलूचिस्तान में हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं।