ब्रिटेन के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन में शामिल होगा कनाडा, औपचारिक आवेदन किया जमा.

अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है जहाँ कनाडा ने ब्रिटेन के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन यानी जॉइंट एक्सपेडिशनरी फोर्स (जेईएफ़) में शामिल होने के लिए औपचारिक रूप से आवेदन कर दिया है। इस कदम को कनाडा और ब्रिटेन के साथ-साथ यूरोपीय सहयोगी देशों के बीच आपसी रक्षा और सैन्य सहयोग को और अधिक मजबूत करने की दिशा में एक बेहद अहम मोड़ माना जा रहा है। तुर्किए की सरकारी समाचार एजेंसी अनादोलू से मिली जानकारी के मुताबिक, कनाडाई प्रधानमंत्री के कार्यालय ने बुधवार को इस बात की आधिकारिक घोषणा की है।
प्रधानमंत्री की मुलाकात के बाद हुआ बड़ा फैसला
यह महत्वपूर्ण घोषणा ब्रिटिश प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम और कनाडाई प्रधानमंत्री के बीच हुई एक उच्च स्तरीय बैठक के तुरंत बाद सामने आई है। इस मुलाकात के दौरान दोनों देशों के शीर्ष नेताओं ने कनाडा और ब्रिटेन के बीच लंबे समय से चले आ रहे रक्षा संबंधों को और अधिक गहराई से मजबूत करने पर लंबी चर्चा की। कनाडाई प्रधानमंत्री कार्यालय ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री ने जेईएफ़ गठबंधन में शामिल होने के लिए आवेदन की पूरी जानकारी दी और इस पहल में कनाडा की भागीदारी के लिए ब्रिटेन की सरकार की ओर से मिले मजबूत समर्थन का खुलकर स्वागत किया है।
किन देशों का यह सैन्य गठबंधन है
जानकारी के लिए बता दें कि इस जॉइंट एक्सपेडिशनरी फोर्स में वर्तमान समय में कई यूरोपीय देश शामिल हैं। इस गठबंधन के मुख्य सदस्य देशों में डेनमार्क, एस्टोनिया, फिनलैंड, आइसलैंड, लातविया, लिथुआनिया, नीदरलैंड, नॉर्वे, स्वीडन और ब्रिटेन शामिल हैं। यह पूरा सैन्य गठबंधन मुख्य रूप से उत्तरी यूरोप और उसके आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने और सैन्य सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से काम करता है। अब कनाडा के इस समूह में जुड़ने से इस संगठन की ताकत और दायरा दोनों ही और अधिक बढ़ जाएंगे।
डिफेंस प्रोग्राम और तकनीकी सहयोग पर भी चर्चा
अपनी इस खास बैठक के दौरान दोनों देशों के नेताओं ने रक्षा-औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा देने के नए रास्तों पर भी विचार-विमर्श किया। इसमें मुख्य रूप से ग्लोबल कॉम्बैट एयर प्रोग्राम (जीसीएपी) का मुद्दा शामिल रहा। आपको बता दें कि कनाडा इसी साल जुलाई के महीने में इस बड़े कार्यक्रम में एक ऑब्जर्वर यानी प्रेक्षक के तौर पर शामिल हुआ था। ब्रिटिश प्रधानमंत्री कार्यालय ने कनाडा के इस कार्यक्रम में पहला ऑब्जर्वर देश बनने पर अपनी प्रसन्नता जताई और इसका जोरदार स्वागत किया। इसके अलावा दोनों नेताओं ने आज के दौर की सबसे बड़ी तकनीकी जरूरत यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़े विभिन्न अवसरों और सामने आ रही चुनौतियों पर भी गंभीर चर्चा की।
बैठक में दोनों पक्षों ने इस बात पर पूरी सहमति जताई कि आज के समय में साझा चिंताओं का सामना करने और इंटरनेट पर ऑनलाइन सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सरकारों और टेक्नोलॉजी क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों का आपस में मिलकर काम करना बेहद जरूरी हो गया है। कनाडा का यह नया कदम ऐसे समय में सामने आया है जब ओटावा लगातार ब्रिटेन और अन्य यूरोपीय देशों के साथ अपने रक्षा और सुरक्षा घेरे को और ज्यादा व्यापक तथा मजबूत बनाने में जुटा हुआ है।