कैप्टन स्मित मच्छड़ को नेशनल बहादुरी पुरस्कार देने की मांग

आसमान में उड़ते विमान के भीतर जब मौत सामने खड़ी हो और कॉकपिट के अंदर ही अचानक कोई हमलावर हो जाए, तो ऐसे में एक पायलट के लिए खुद को संभालना और सैकड़ों यात्रियों की जान बचाना किसी चमत्कार से कम नहीं होता। हाल ही में फ्लाईदुबई की एक उड़ान के दौरान कुछ ऐसा ही खौफनाक मंजर सामने आया, जब विमान के भीतर ही एक बड़ी सुरक्षा चुनौती खड़ी हो गई। इस विकट परिस्थिति में भारतीय मूल के पायलट ने जिस अदम्य साहस और सूझबूझ का परिचय दिया, उसकी चारों तरफ चर्चा हो रही है। अब उनकी इस बहादुरी के लिए उन्हें देश के सर्वोच्च सम्मान से नवाजने की मांग उठाई जा रही है।
फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट (FIP) ने प्रधानमंत्री कार्यालय को एक पत्र लिखकर कैप्टन स्मित मच्छड़ को नेशनल ब्रेवरी अवार्ड (National Bravery Award) के लिए विचार करने का आग्रह किया है। यह घटना 30 सितंबर की है, जब फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 हवा में थी और उस दौरान कॉकपिट के भीतर एक खतरनाक स्थिति उत्पन्न हो गई थी। इसके बावजूद कैप्टन स्मित मच्छड़ ने अपनी जान की परवाह किए बिना अपने कर्तव्यों का पालन किया और विमान को सुरक्षित रूप से साउदी अरब के तबुक शहर में लैंड कराया।
हवा में 182 जिंदगियों का संकट
फेडरेशन की ओर से भेजे गए पत्र में बताया गया है कि जब कॉकपिट के अंदर हमला हुआ, तो स्थिति बेहद गंभीर और अप्रत्याशित थी। सामान्य ट्रेनिंग के दौरान पायलट ऐसी आपात स्थितियों का सामना करने के लिए तैयार रहते हैं, लेकिन केबिन के अंदर से इस तरह का अप्रत्याशित खतरा पूरी तरह अलग चुनौती पेश करता है। कैप्टन स्मित ने गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद असाधारण संयम दिखाया और विमान पर अपना नियंत्रण नहीं खोया।
उड़ान के दौरान विमान में कुल 174 यात्री और 8 क्रू मेंबर यानी कुल 182 लोग सवार थे। यदि उस नाजुक मोड़ पर कैप्टन और अन्य साथियों ने सूझबूझ न दिखाई होती, तो एक बड़ा हादसा हो सकता था। यात्रियों की सुरक्षा पूरी तरह से उड़ान दल के नियंत्रण पर टिकी हुई थी। कैप्टन ने अपनी गंभीर चोटों और दर्द को दरकिनार करते हुए जिस पेशेवर जिम्मेदारी का परिचय दिया, उसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।
असाधारण साहस और सूझबूझ की दास्तान
घटना के दौरान विमान अचानक नीचे की ओर गोता लगाने लगा था, जिससे यात्रियों में भी दहशत फैल गई थी। लेकिन कैप्टन स्मित मच्छड़ ने भारी संघर्ष के बाद स्थिति पर काबू पाया। क्रू मेंबर्स और यात्रियों की मदद से हमलावर को काबू में किया गया और विमान को तबुक में सुरक्षित उतार लिया गया। इस घटना के बाद प्रधानमंत्री ने भी कैप्टन के धैर्य और सूझबूझ की सराहना की थी।
फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट ने उम्मीद जताई है कि इस वीरतापूर्ण कार्य के लिए कैप्टन स्मित को राष्ट्रीय मान्यता मिलने से न सिर्फ उनका व्यक्तिगत सम्मान बढ़ेगा, बल्कि पूरी दुनिया में यह संदेश जाएगा कि भारत अपने जांबाज नागरिकों के साहस और मानवीय मूल्यों की कितनी कद्र करता है।