अमेरिकी सेंट्रल कमांड की नाकाबंदी से ईरान को बड़ा झटका, 100 दिनों में 25 अरब डॉलर का तेल राजस्व गंवाया
अमेरिकी सेंट्रल कमांड की नाकाबंदी के कारण ईरान 100 दिनों में 25 अरब डॉलर का तेल राजस्व नहीं कमा सका।

वॉशिंगटन: अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया है कि ईरान पर लगाई गई नौसैनिक नाकाबंदी के कारण यह देश पिछले 100 दिनों में कम से कम 25 अरब डॉलर का कच्चा तेल निर्यात नहीं कर पाया है। 14 जुलाई 2026 को इस नाकाबंदी को सख्ती से लागू किए जाने के बाद से ईरान की तेल कमाई पर गहरा असर पड़ा है।
अधिकारियों ने इस ऑपरेशन को एक स्टील वॉल की तरह बताया है। इसका मुख्य मकसद ईरान के तेल निर्यात को रोकना और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के पास पहुंचने वाले वित्तीय संसाधनों को कम करना है।
सेंटकॉम के मुताबिक, यह नाकाबंदी सबसे पहले 13 अप्रैल 2026 को लागू की गई थी। इसके बाद से अमेरिका द्वारा अधिकृत मानवीय सहायता को छोड़कर ईरान के सभी समुद्री निर्यात और आयात पूरी तरह बंद हो गए हैं।
सेंटकॉम कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने कहा कि इन कदमों से IRGC की क्षमता काफी कम हुई है। इससे सहयोगी मिलिशिया, आपराधिक नेटवर्क और विभिन्न आतंकवादी गतिविधियों को फंड देने में ईरान को मुश्किल आ रही है।
तेल के अलावा अमेरिका ने ईरान की 350 मिलियन डॉलर की क्रिप्टोकरेंसी भी फ्रीज कर दी है। इस रणनीति के तहत नाकाबंदी को तोड़ने की कोशिश करने वाले व्यापारिक जहाजों को रोका गया और उन्हें निष्क्रिय किया गया।
अक्टूबर 2026 के मध्य तक की जानकारी के अनुसार, दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के जलक्षेत्र में ईरान का फ्लोटिंग ऑयल रिजर्व लगभग खत्म हो गया है, क्योंकि वह नई सप्लाई नहीं भेज पा रहा है।
इस बीच तनाव और बढ़ गया है। IRGC अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य में अपने एस्कॉर्ट ऑपरेशन जारी रखे, तो यह संघर्ष अमेरिकी सैन्य ठिकानों तक फैल सकता है।
दूसरी ओर, राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान पर आरोप लगाया है कि वह क्षेत्र में जहाजों पर हमलों की झूठी खबरें फैला रहा है ताकि वैश्विक तेल कीमतों को कृत्रिम रूप से बढ़ाया जा सके।