Saudi Arabia में CENTCOM कमांडर का दौरा, Houthi हमलों के बीच अमेरिका ने सीधी सैन्य कार्रवाई से किया इनकार.

सऊदी अरब में क्षेत्रीय तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है और इसी बीच अमेरिकी सेना के बड़े अधिकारी ने हालात का जायजा लेने के लिए दौरा किया है। यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने गुरुवार, 10 सितंबर 2026 को सऊदी अरब का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने यमन में होथी बलों की तरफ से तेजी से हो रहे क्षेत्रीय कब्जों को लेकर अहम समन्वय बैठकें कीं। यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब पिछले 48 घंटों के दौरान इस पूरे इलाके में सुरक्षा को लेकर हालात काफी तनावपूर्ण बने हुए हैं और आम जनता से लेकर सरकार तक की चिंताएं बढ़ गई हैं।
सऊदी क्राउन प्रिंस और अमेरिकी राष्ट्रपति के बीच हुई बात
इस बड़े तनाव के बीच कूटनीतिक स्तर पर भी बातचीत का दौर जारी रहा। 10 सितंबर को सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ दो बार टेलीफोन पर बातचीत की। इस बातचीत के दौरान सऊदी पक्ष की तरफ से होथी आंदोलन के खिलाफ सीधे अमेरिकी सैन्य हमले करने का अनुरोध किया गया था। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस अनुरोध को स्वीकार करने से मना कर दिया। अमेरिकी अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की कि वाशिंगटन की तरफ से फिलहाल किसी भी तरह के सीधे सैन्य हस्तक्षेप की कोई योजना नहीं बनाई गई है। इसके बजाय अमेरिकी प्रशासन ने केवल गैर-गतिशील यानी नॉन-काइनेटिक सहायता देने की बात कही है, जिसमें सऊदी बलों के लिए जरूरी खुफिया जानकारी और टार्गेट डेटा उपलब्ध कराना शामिल है। मौजूदा समय में लगभग 200 अमेरिकी सैन्यकर्मी सऊदी अरब में तैनात हैं जो वहां की सेना को लगातार सलाह और संपर्क सहयोग दे रहे हैं।
लाल सागर और बंदरगाहों पर होथी बलों का बढ़ता कब्जा
क्षेत्रीय तनाव उस समय अपने चरम पर पहुंच गया जब 11 सितंबर को होथी बलों ने बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य की तरफ तेजी से आगे बढ़ते हुए धूबाब और परिम यानी मय्यन द्वीप पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया। ये कब्जे 10 सितंबर को रणनीतिक रूप से बेहद अहम लाल सागर के मोखा बंदरगाह पर कब्जा करने के ठीक बाद हुए हैं। इन हमलों का जवाब देते हुए सऊदी अरब की तरफ से 11 सितंबर को मोखा एयरपोर्ट पर दो हवाई हमले किए गए, जिसकी जानकारी होथी-नियंत्रित मीडिया द्वारा दी गई। इस हफ्ते की शुरुआत में दक्षिणी सऊदी शहरों में नागरिकों को निशाना बनाकर किए गए होथी हमलों में कुल 73 लोग घायल हो गए थे, जिससे आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर बड़ा खतरा पैदा हो गया है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और विस्थापितों का संकट
इस पूरे मामले पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 10 सितंबर को सऊदी अरब के राजदूत अब्दुलअजीज अलवासिल ने चेतावनी दी कि रियाद होथी आक्रामकता का सामना करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा। इसके विपरीत, ईरान के विदेश मंत्रालय ने बातचीत का समर्थन किया और कहा कि इस संघर्ष को नाकाबंदी या सैन्य ताकत के जरिए हल नहीं किया जा सकता है। वहीं दूसरी ओर, रशाद अल-अलिमी के नेतृत्व वाली यमन की राष्ट्रीय रक्षा परिषद ने कहा कि होथी बलों के ये मौजूदा क्षेत्रीय कब्जे अस्थायी हैं और इनसे कोई नई भौगोलिक स्थिति तय नहीं होगी। समुद्री मोर्चे की बात करें तो होथी सैन्य प्रवक्ता याह्या सारेई ने 11 सितंबर को पुष्टि की कि लाल सागर में नौवहन सभी शिपिंग कंपनियों के लिए खुला है, लेकिन सऊदी जहाजों पर पहले से लगा प्रतिबंध जारी रहेगा। इस भीषण लड़ाई की वजह से इंसानी जिंदगी पर बहुत बुरा असर पड़ा है और अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले हफ्ते लड़ाई तेज होने के बाद से यमन में 46,000 से ज्यादा लोग अपने घरों को छोड़कर विस्थापित हो चुके हैं। अमेरिकी प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने साफ किया कि अमेरिका अपने राष्ट्रीय सुरक्षा हितों की रक्षा करने और लाल सागर में जहाजों की आवाजाही की स्वतंत्रता बनाए रखने पर पूरा ध्यान दे रहा है ताकि क्षेत्रीय साझेदार अपनी सुरक्षा चुनौतियों से खुद निपट सकें।